द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा बैद्यनाथ मंदिर की नगरी देवघर महाशिवरात्रि को लेकर पूरी तरह सजधज कर तैयार है। 15 फरवरी की शाम 6 बजे केकेएन स्टेडियम से भगवान भोलेनाथ की भव्य शिव बारात निकाली जाएगी। आयोजन को लेकर शहर के प्रमुख मार्गों और चौक-चौराहो
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पर्यटन विभाग और स्थानीय समाजसेवी अभिषेक झा के नेतृत्व में कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने बताया कि मेला क्षेत्र और बारात मार्ग पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए ड्रोन कैमरों से निगरानी भी होगी।
झांकियों में दिखेगा साइबर दैत्य, 12 ज्योतिर्लिंगों का होगा दर्शन
शिव बारात केकेएन स्टेडियम से निकलकर बजरंगी चौक, टावर चौक, आजाद चौक, भैरो बाजार, नरसिंह टॉकीज रोड, शिक्षा सभा, चांदनी चौक और बैद्यनाथ लेन होते हुए मंदिर के पूरब द्वार से प्रवेश करेगी। इस बार झांकियां मुख्य आकर्षण का केंद्र होंगी। साइबर अपराध के प्रति जागरूकता के लिए ‘साइबर दैत्य’ की विशेष झांकी तैयार की गई है।
श्रद्धालुओं को एक साथ 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराने की व्यवस्था की गई है। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘कलयुग थीम’, ‘कल्कि अवतार’ और भगवान गणेश की झांकियां भी बारात में शामिल होंगी। देवी-देवताओं, भूत-प्रेतों, साधु-संतों और राक्षसों के स्वरूप में कलाकार आकर्षक प्रस्तुति देंगे।
तासा दल और शिव विवाह की रस्म बनेगी केंद्रबिंदु
बारात में 15 से 20 तासा दल, बैंड पार्टी, भांगड़ा दल, घोड़े-ऊंट और सांस्कृतिक टीमें शामिल होंगी। छऊ और लोकनृत्य की प्रस्तुतियां माहौल को और भक्तिमय बनाएंगी। महाशिवरात्रि पर शिव विवाह की पौराणिक परंपरा निभाई जाएगी, जिसमें सिंदूरदान की रस्म विशेष आकर्षण रहेगी।
पूरे शहर में शिव धुन गूंज रही है। हालांकि कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार प्रकाश सज्जा पहले की तुलना में थोड़ी कम दिख रही है और मेयर चुनाव के कारण उत्साह में हल्की कमी है, फिर भी श्रद्धालुओं में बारात को लेकर भारी उत्साह बना हुआ है।
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देवघर में महाशिवरात्रि से पहले बाबा बैद्यनाथ और मां पार्वती मंदिरों के शिखर से पंचशूलों को उतारा गया। शुक्रवार को यह प्राचीन परंपरा निभाई गई, जिसके तहत शनिवार को इन पंचशूलों की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। यह अनुष्ठान हर वर्ष महाशिवरात्रि से एक या दो दिन पहले होता है।
दोपहर में भंडारी परिवार की देखरेख में भंडारियों की टीम ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचशूलों को नीचे उतारा। इसके बाद दोनों पंचशूलों का पारंपरिक मिलन कराया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। भक्तों ने पंचशूलों को स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और जयकारे लगाए। यहां पढ़ें पूरी खबर…




