रांची2 घंटे पहले
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झारखंड में ट्रेजरी घोटाले का दायरा बढ़ता जा रहा है। अब रामगढ़ के जिला पशुपालन कार्यालय में वेतन मद से 34.25 लाख रुपए की फर्जी निकासी का खुलासा हुआ है।
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. लाल बिहारी प्रसाद ने इस मामले में तत्कालीन लेखापाल मुनिन्द्र कुमार और एक फर्जी कर्मचारी पोकली उरांव के खिलाफ रामगढ़ थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। यह पूरा खेल कुबेर पोर्टल पर फर्जी आईडी बनाकर और निजी बैंक खातों का इस्तेमाल कर खेला गया। मनिन्द्र कुमार अभी इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन, कांके में कार्यरत है।
जांच में पता चला कि मुनिन्द्र ने पोकली उरांव के नाम से फर्जी कर्मचारी की आईडी (TMP/RGH/02000) बनाई। इस फर्जी नाम पर अगस्त 2021 से जनवरी 2022 के बीच 10.91 लाख रुपए की अवैध निकासी की। इसे एक्सिस बैंक के रांची के दीपाटोली शाखा में उसके खाते में भेजा गया।
उत्पाद सचिव के नेतृत्व में भी उच्चस्तरीय समिति बनी
अवैध निकासी की जांच के लिए सरकार ने उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें वित्त विभाग द्वारा गठित छह सदस्यीय समिति व पीएजी (ऑडिट) द्वारा मनोनीत एक अधिकारी को शामिल किया गया है। वित्त विभाग की समिति में उपसचिव ज्योति झा, अवर सचिव कपिलदेव पंडित, लेखा नियंत्रक नरेश झा, एनआईसी के वरीय निदेशक ओमेश कुमार सिन्हा, सहायक निदेशक गौरव कुमार और प्रशाखा पदाधिकारी खिरोद सिंह मुंडा सदस्य हैं।
बोकारो-हजारीबाग में घोटाले की जांच सीआईडी के हवाले
ट्रेजरी से करोड़ों रुपए की अवैध निकासी मामले में वित्त विभाग ने इस घोटाले की परतें खोलने के लिए त्रिस्तरीय जांच की व्यवस्था लागू की है। इस संबंध में शुक्रवार को तीन आदेश जारी किए गए। इसके मुताबिक बोकारो और हजारीबाग में थाने में दर्ज केस की जांच सीआईडी को सौंप दी गई है। वित्त सचिव प्रशांत कुमार ने इस आशय का पत्र गृह विभाग को भेजा है। दोनों केस सीआईडी को ट्रांसफर करने को कहा है।
बोकारो व हजारीबाग ट्रेजरी और एसपी ऑफिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि एचआरएमएस ओर आईएफएमएस सिस्टम के डेटा में छेड़छा़ की गई है।


