GenZ एंप्लॉय की कैंसिल हुई छुट्टी, तो सामने से मिला ऐसा जवाब…वायरल हुआ वीडियो

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GenZ एंप्लॉय की कैंसिल हुई छुट्टी, तो सामने से मिला ऐसा जवाब…वायरल हुआ वीडियो

सोचिए, आप पूरे उत्साह के साथ अपनी फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंच चुके हैं. बैग पैक है, दोस्त साथ हैं और दिमाग में बस छुट्टियों की खुशियां घूम रही हैं. तभी अचानक एक कॉल या मैसेज आता है कि आपकी छुट्टी रद्द कर दी गई है. ऐसे में किसी का भी गुस्सा आना लाज़िमी है. आमतौर पर लोग तुरंत अपने बॉस से बात करते हैं, नाराज़गी जताते हैं और छुट्टी बचाने की कोशिश करते हैं. लेकिन नई पीढ़ी यानी जेनजी के एक कर्मचारी ने इस स्थिति से निपटने का बिल्कुल अलग तरीका चुना.

यह मामला सिमरन नाम की एक युवती से जुड़ा है, जो एयरपोर्ट पर खड़ी होकर अपना अनुभव कैमरे में रिकॉर्ड करती नजर आ रही हैं. उनके चेहरे पर नाराजगी भी है और आत्मविश्वास भी. वीडियो में वह बताती हैं कि उनके मैनेजर ने आखिरी समय पर उनकी छुट्टी रद्द कर दी, जबकि उन्होंने काफी पहले इसकी जानकारी दे दी थी.

क्या कहा आखिर सिमरन ने?

सिमरन के अनुसार, उन्होंने 22 जनवरी को ही अपने मैनेजर को साफ-साफ बता दिया था कि 19 फरवरी को वह वियतनाम जाने वाली हैं. उस समय मैनेजर को इस योजना से कोई समस्या नहीं थी. सब कुछ तय था.टिकट बुक, होटल रिजर्व और दोस्तों के साथ ट्रिप की पूरी तैयारी. लेकिन जैसे ही छुट्टी का दिन आया और वह एयरपोर्ट पहुंचीं, अचानक उन्हें सूचित किया गया कि उनकी छुट्टी कैंसिल कर दी गई है.

वीडियो में सिमरन कहती हैं कि वह काम इसलिए करती हैं ताकि जिंदगी का आनंद ले सकें, घूम सकें और आजादी महसूस कर सकें. उनके शब्दों में एक साफ संदेश छिपा है.काम जीवन का हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं. वह बताती हैं कि उन्हें काम करने का कोई विशेष शौक नहीं है, बल्कि वह इसलिए काम करती हैं ताकि अपनी पसंद की जिंदगी जी सकें.

उनका कहना है कि अगर पहले से मंजूर की गई छुट्टी को अचानक रद्द किया जाएगा, तो यह कर्मचारी के साथ नाइंसाफी है. खासकर तब, जब सारी योजनाएं बन चुकी हों और पैसे भी खर्च हो चुके हों. सिमरन का वीडियो सिर्फ एक शिकायत नहीं है, बल्कि यह उस सोच को दर्शाता है जो आज की युवा पीढ़ी में तेजी से उभर रही है.वर्क-लाइफ बैलेंस की अहमियत.

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वीडियो में वह यह भी कहती हैं कि अब उनका लैपटॉप अगले 10 दिनों तक नहीं खुलेगा. यह बात वह पूरे आत्मविश्वास के साथ कहती हैं, जैसे यह उनका अपना फैसला हो. उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. कुछ लोग उनके साहस की तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना चाहिए. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि ऑफिस की जिम्मेदारियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

इस घटना ने एक बड़ी बहस को जन्म दिया है.क्या कंपनियों को कर्मचारियों की निजी जिंदगी और पहले से तय योजनाओं का सम्मान करना चाहिए? या फिर काम की जरूरतें सबसे ऊपर होनी चाहिए? आज के दौर में युवा कर्मचारी अपने समय और निजी जीवन को लेकर ज्यादा सजग हैं. वे सिर्फ सैलरी के लिए काम नहीं करना चाहते, बल्कि संतुलित और संतुष्ट जीवन जीना चाहते हैं.

यहां देखिए वीडियो

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