पटना26 मिनट पहले
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आज उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और प्रीति योग और आयुष्मान योग के सुयोग में गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है। आज गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट किया जा रहा है।
सनातन धर्म मे गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। गुरु कृपा से ही शांति, आंनद और मोक्ष प्राप्त होता है। गुरु पूर्णिमा से चातुर्मास तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं। चातुर्मास मौसम की नजरिए से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं।

सहस्त्र अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य
ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया, ‘आज श्रद्धालु आज भगवान नारायण को गंगाजल, शंख जल के बाद पंचामृत से स्नान, चंदन का लेप, घी का दीपक, खीर का भोग अर्पण कर कर्पूर की आरती करेंगे। पूर्णिमा की पूजा के बाद घरों में घंटी, डमरू, करताल और शंख ध्वनि से सुख-समृद्धि का वास, निरोग काया की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है।’

गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्ता
मान्यताओं के मुताबिक, ऋषि पाराशर और देवी सत्यवती के यहां पुत्र के रूप में वेद व्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था। भगवान गणेश के कहने पर उन्होंने महाभारत महाकाव्य की रचना की।
वेद व्यास ने वेदों को चार वर्ग में वर्गीकृत किया था, जिसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद शामिल है। उनकी इस विरासत को उनके शिष्यों पैला, वैशम्पायन, जैमिनी और सुमंतु ने आगे बढ़ाया। इसलिए इस दिन वेद व्यास के जयंती के रूप में भी मनाई जाती है।
जानिए गुरु पूर्णिमा पर गुरु की पूजा कैसे कर सकते हैं:
अगर गुरु जीवित हैं तो गुरु पूर्णिमा पर उनकी साक्षात पूजा करें। अगर हम गुरु की साक्षात पूजा नहीं कर सकते हैं तो उनके चित्र की पूजा करें। अगर गुरु जीवित नहीं हैं या किसी को गुरु नहीं बनाया है तो अपने इष्टदेव जैसे शिव जी, श्रीहरि, गणेश जी, श्रीकृष्ण, श्रीराम, हनुमान, देवी दुर्गा की पूजा कर सकते हैं। इनके साथ ही वेद व्यास की भी पूजा करनी चाहिए।
- पूजा सामग्री – दीपक, धूप, चावल, हार-फूल, चंदन, रोली, फल, मिठाई, नारियल, जल कलश, नैवेद्य आदि।
- गुरु पूर्णिमा पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद घर में भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं का ध्यान करें। इसके बाद अपने गुरु का चित्र, वेद व्यास का चित्र और अपने इष्टदेव का चित्र या प्रतिमा रखें।
- पूजा से पहले हाथ में जल लेकर संकल्प लें। संकल्प यानी पूजा में कहें “मैं गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर अपने गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता/करती हूं और उनकी कृपा प्राप्त करने हेतु ये पूजा कर रहा/रही हूं।”
- संकल्प के बाद भगवान और गुरु को जल का छिड़काव करें। हार-फूल चढ़ाएं। धूप-दीपक जलाएं।
- चंदन और रोली से तिलक करें।
- गुरु वंदना, स्तोत्र, वेदव्यास अष्टकम या गुरु स्तुति पढ़ें।
- प्रसाद अर्पण करें। फल, मिठाई या खीर का भोग लगाएं।
- गुरु को वस्त्र या उपहार दें। यदि गुरु आपके सामने हैं तो उन्हें वस्त्र, पुस्तक या दक्षिणा समर्पित करें।
- पूजा के अंत में जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। पूजा के बाद प्रसाद बांटें और खुद भी लें।
- पूजा में ऊँ गुरु देवाय नमः मंत्र का जप करना चाहिए।
गुरु पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम करें
- संत, महात्मा और आध्यात्मिक गुरु इस दिन विशेष प्रवचन, सत्संग और भंडारे का आयोजन करते हैं, ऐसे आयोजन में शामिल होना चाहिए।
- गुरु को श्रद्धा पूर्वक दक्षिणा (दान) देना प्राचीन परंपरा है। ये धन के साथ-साथ सेवा या विद्या अर्जन के रूप में भी दी जाती है। यदि संभव हो तो गुरु के चरण स्पर्श करें, उन्हें वंदन करें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें।
- श्रीमद्भगवद्गीता, गुरु गीता, वेदव्यास अष्टकम या किसी अन्य गुरु उपदेशात्मक ग्रंथ का पाठ करें।
- गरीबों, ब्राह्मणों, विद्यार्थियों और जरूरतमंदों को दान करें। अन्न, वस्त्र, छाता, पंखा आदि का दान कर सकते हैं।
- कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं। फलाहार लेते हैं और अपने आहार, वाणी व विचारों में संयम रखते हैं।
- गुरु पूर्णिमा एक प्रेरणादायक अवसर है। इस दिन आत्मिक उन्नति, सकारात्मक जीवनशैली, और अध्ययन के लिए नए संकल्प लेना चाहिए।

