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JPSC सहायक वन संरक्षक परीक्षा; प्रश्नपत्र में कई गलतियां:राष्ट्रीय को लिखा 'रार्ष्ट्रीय', महत्वपूर्ण हुआ 'महत्वपूर्न', मॉडरेशन प्रक्रिया पर उठे सवाल


झारखंड लोक सेवा आयोग की सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा इन दिनों गंभीर त्रुटियों को लेकर चर्चा में है। चार अप्रैल से शुरू हुई यह परीक्षा 12 अप्रैल तक चलनी है, लेकिन सोमवार को आयोजित सामान्य अध्ययन के दूसरे पेपर ने आयोग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों के अनुसार प्रश्न पत्र में दर्जनों अशुद्धियां हैं, जिससे कई सवालों के अर्थ ही बदल गए। स्थिति इतनी खराब रही कि लगभग हर प्रश्न में तीन से चार तक गलतियां देखने को मिलीं, जिससे परीक्षार्थियों को उत्तर देने में भारी परेशानी हुई। संवैधानिक शब्दों तक में गलतियां प्रश्न पत्र में बुनियादी और महत्वपूर्ण शब्दों तक को गलत छापा गया। ‘सर्वोच्च न्यायालय’ जैसे संवैधानिक शब्द को ‘सर्वोच न्यायातक’ लिखा गया, वहीं ‘राष्ट्रीय’ को ‘रार्ष्ट्रीय’ और ‘ऐतिहासिक’ को ‘इतिहासिक’ बना दिया गया। इसके अलावा ‘प्रश्न’ को ‘प्रशन’, ‘पुस्तक’ को ‘पुस्तख’, ‘टिप्पणी’ को ‘रिप्पणी’ और ‘महत्वपूर्ण’ को ‘महत्वपूर्न’ लिखा गया। इन त्रुटियों ने न सिर्फ भाषा की शुद्धता पर सवाल उठाए, बल्कि कई सवालों का आशय भी बदल दिया, जिससे परीक्षार्थियों में भ्रम की स्थिति बनी रही। मॉडरेशन प्रक्रिया पर उठे सवाल विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्न पत्र तैयार होने के बाद उसकी मॉडरेशन यानी जांच प्रक्रिया अनिवार्य होती है। यदि विषय विशेषज्ञों ने प्रश्न पत्र को एक बार भी ध्यान से पढ़ा होता, तो इतनी बड़ी चूक संभव नहीं थी। जानकारों के मुताबिक यह लापरवाही सीधे तौर पर आयोग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करती है। वर्षों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को अब इस गलती का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जिससे उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रश्नपत्र में गलतियों की लिस्ट राज्य के गौरव से जुड़े नाम भी गलत सबसे गंभीर बात यह रही कि प्रश्न पत्र में झारखंड के गौरव और अस्मिता से जुड़े नामों को भी गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। अमर शहीद सिदो-कान्हू का नाम ‘सिडो-कान्हु’ छापा गया, जबकि ‘आंदोलन’ को ‘आंदोलना’ और ‘सांस्कृतिक’ को ‘सांस्क्रृतिक’ लिखा गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह केवल टाइपिंग की गलती नहीं, बल्कि राज्य के इतिहास और जनभावनाओं के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है। इस परीक्षा के माध्यम से 78 पदों पर नियुक्ति होनी है, लेकिन ऐसी गंभीर त्रुटियों ने पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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