सहरसा में एम्स (AIIMS) की स्थापना की मांग एक बार फिर जोर पकड़ गई है। कोशी और सीमांचल क्षेत्र के करोड़ों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘कोशी विकास संघर्ष मोर्चा’ ने एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया। मोर्चा ने प्रधानमंत्री नर
.
मोर्चा के संस्थापक अध्यक्ष विनोद कुमार झा (अधिवक्ता) और पूर्व जिला पार्षद प्रवीण आनंद द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में क्षेत्र की बदहाली का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि कोशी क्षेत्र की जनता वर्षों से बाढ़, कटाव, विस्थापन, महामारी, गरीबी और पलायन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण आज भी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को पटना और दिल्ली जैसे महानगरों की ओर जाना पड़ता है।

सहरसा में एम्स की स्थापना को आवश्यक बताया
ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि इलाज की कमी के कारण गरीब परिवार कर्ज के जाल में फंस रहे हैं और अपनी जमीन बेचने को मजबूर हैं। मोर्चा ने करोड़ों की आबादी की उपेक्षा का मुद्दा उठाते हुए सहरसा में एम्स की स्थापना को आवश्यक बताया है।
सहरसा पूरे कोशी और सीमांचल क्षेत्र का केंद्र बिंदु
मोर्चा ने तर्क दिया है कि भौगोलिक दृष्टि से सहरसा पूरे कोशी और सीमांचल क्षेत्र का केंद्र बिंदु है। यदि यहां एम्स की स्थापना होती है, तो सहरसा के साथ-साथ सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार और पड़ोसी देश नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों की एक बड़ी आबादी को अत्याधुनिक और सस्ती चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। इससे क्षेत्र के विकास, शिक्षा और रोजगार को भी नई दिशा मिलेगी।
उपयुक्त सरकारी भूमि उपलब्ध
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सहरसा में एम्स के मानकों के अनुरूप पर्याप्त और पूरी तरह से उपयुक्त सरकारी भूमि उपलब्ध है, जो भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से उत्तम है। इसके विपरीत, दरभंगा में पूर्व में चयनित की गई कई भूमियों को तकनीकी और मानक संबंधी कारणों से पहले ही खारिज किया जा चुका है। मोर्चा ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व में जिस भूमि को संबंधित कमेटी द्वारा खारिज कर दिया गया था, उसी पर दोबारा विचार करना अनुचित है।


