Sunday, September 20, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

Mahabharani Shraddha 2026: पितृ पक्ष में महाभरणी श्राद्ध इतना खास क्यों? जानिए यमराज और गया तीर्थ से जुड़ा शास्त्रीय संबंध

[

महाभरणी श्राद्ध 2026: पितृ पक्ष का पखवाड़ा शुरू होते ही लोग अपने पूर्वजों की स्मृति और शांति के लिए तर्पण में जुट जाते हैं. सामान्यतः लोग अपने पितरों की मृत्यु तिथि के अनुसार ही श्राद्ध कर्म करते हैं, लेकिन इस 16 दिनी अवधि में एक ऐसी तारीख आती है जिसे शास्त्रों में ‘महाभरणी’ कहा गया है.

अक्सर यह सवाल उठता है कि सामान्य तिथियों की तुलना में महाभरणी को इतना प्रभावशाली क्यों माना जाता है? क्या वाकई इस एक दिन तर्पण करने से बिहार के प्रसिद्ध गया तीर्थ जितना पुण्य मिलता है?

वैदिक पंचांग और धर्मग्रंथों के संदर्भों के आधार पर समझते हैं कि 2026 में महाभरणी श्राद्ध कब है और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं क्या हैं.

2026 में कब है महाभरणी श्राद्ध?

पंचांग गणना के अनुसार, जब पितृ पक्ष के दौरान भरणी नक्षत्र का संयोग बनता है, तो उसे ‘महाभरणी श्राद्ध’ कहा जाता है. इस वर्ष यह संयोग 29 सितंबर 2026 (मंगलवार) को बन रहा है.

शास्त्रों में श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर के समय को सबसे उपयुक्त माना गया है, जिसे कुतुप और रौहिण काल कहा जाता है:

  • कुतुप काल: सुबह 11:46 से दोपहर 12:34 तक
  • रौहिण काल: दोपहर 12:34 से दोपहर 01:22 तक
  • अपराह्न काल (मुख्य श्राद्ध समय): दोपहर 01:22 से 03:45 तक

सूर्योदय के आधार पर अलग-अलग शहरों में इन मुहूर्तों में 4 से 8 मिनट का अंतर आ सकता है.

क्यों माना जाता है इसे इतना महत्वपूर्ण? 3 प्रमुख कारण

यमराज और भरणी नक्षत्र का संबंध

वैदिक ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्र हैं, जिनमें दूसरा नक्षत्र भरणी है. धर्मग्रंथों के मुताबिक, इस नक्षत्र के अधिपति स्वयं धर्मराज (यमराज) हैं. मान्यता है कि पितृ पक्ष में जब चंद्रमा भरणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब पितृलोक से आए पूर्वजों की तृप्ति के मार्ग सुगम होते हैं. यमराज के आधिपत्य वाला नक्षत्र होने के कारण इस दिन किया गया तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचता है.

गया तीर्थ के समतुल्य फल की मान्यता

प्राचीन ग्रंथ निर्णयसिंधु में उल्लेख मिलता है कि यदि कोई व्यक्ति आर्थिक, शारीरिक या पारिवारिक कारणों से बिहार के गया जाकर पिंडदान नहीं कर पाता, तो वह महाभरणी के दिन अपने घर पर या किसी स्थानीय पवित्र नदी के तट पर विधिपूर्वक श्राद्ध कर सकता है. शास्त्रों में इसे गया श्राद्ध के समतुल्य माना गया है, हालांकि यह तीर्थ श्राद्ध का आध्यात्मिक विकल्प है, उसका स्थायी विकल्प नहीं.

हाल ही में दिवंगत हुए परिजनों के लिए शांति

परंपरा के अनुसार, जिन परिजनों का निधन बीते एक वर्ष के भीतर हुआ हो, उनके निमित्त महाभरणी के दिन विशेष तर्पण और पिंडदान करने का विधान है. माना जाता है कि इससे दिवंगत आत्मा को नई यात्रा में शांति मिलती है.

श्राद्ध की सरल और शास्त्रसम्मत विधि

यदि आप घर पर महाभरणी श्राद्ध कर रहे हैं, तो इन मुख्य चरणों का पालन करें:

दक्षिण मुखी तर्पण: दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें. तांबे या पीतल के पात्र में जल, थोड़ा कच्चा दूध, काले तिल और गंगाजल मिलाएं. हाथ की अनामिका उंगली में कुश की पवित्री पहनकर तीन बार पितरों को जलांजलि दें.

पंचबलि भोग: घर पर बने सात्विक भोजन से पांच हिस्से निकालें, गाय (गो-बलि), कुत्ते (श्वान-बलि), कौवे (काक-बलि), अग्नि/देवता और चींटियों के लिए.

ब्राह्मण भोजन व दान: किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को आदरपूर्वक भोजन कराएं और सामर्थ्य अनुसार वस्त्र, अन्न या दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें.

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • भोजन पूरी तरह सात्विक होना चाहिए. इसमें लहसुन, प्याज, मसूर दाल और बैंगन का प्रयोग शास्त्रों में वर्जित बताया गया है.
  • श्राद्ध कर्म में कांच, लोहा या प्लास्टिक के बर्तनों का इस्तेमाल करने से बचें; इसके स्थान पर पीतल, तांबा या पत्तलों का प्रयोग करें.
  • यह दिन केवल कर्मकांड का नहीं, बल्कि पितरों के प्रति कृतज्ञता और संयम का है, इसलिए घर में वाद-विवाद से दूर रहें.

सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रहा है ‘हनुमान अंश’ का आखिरी सीन? मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान दिखा यह अद्भुत नजारा

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles