पटना8 मिनट पहलेलेखक: नवजीत
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पहले यह बयान पढ़िए
मॉडल स्कूल में ऐसी व्यवस्था तैयार करनी है कि सरकार के मंत्री और ऑफिसर अपने बच्चे का एडमिशन कराने को तरसे।– सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री
अब हकीकत देखिए, मॉडल स्कूलों में अप्रैल 2026 से एडमिशन शुरू हो गया, लेकिन यहां पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं मिल रहे। राज्य के सरकारी स्कूलों के शिक्षक मॉडल स्कूल में जाने में रुचि नहीं दिखा रहे।
बिहार सरकार मॉडल स्कूल के लिए सबसे अच्छे शिक्षकों को चुनने के लिए इंटरव्यू कराती है।
मेरिट लिस्ट के आधार पर मॉडल स्कूल में पढ़ाने का मौका मिलता है, लेकिन शिक्षक आवेदन ही नहीं कर रहे हैं।
भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़िए, मॉडल स्कूल को क्यों शिक्षक नहीं मिल रहे हैं?
एक भी स्कूल में फाइनल नहीं हुई पोस्टिंग की प्रक्रिया
मॉडल स्कूलों में टीचर पोस्टिंग की प्रक्रिया स्लो है। सभी 38 जिलों के एक भी स्कूल में टीचर पोस्टिंग की प्रक्रिया फाइनल नहीं हो सकी है। इंटरव्यू और प्रोविजनल मेरिट लिस्ट से आगे कार्रवाई नहीं बढ़ी है।
पूर्व सीएम नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा में बात इंटरव्यू से आगे नहीं बढ़ी है। वहीं, मौजूदा सीएम सम्राट चौधरी के जिला में प्रोविजनल मेरिट लिस्ट जारी की गई।
मुंगेर जिला में मात्र 55 आवेदन मिले हैं। 22-23 अप्रैल 2026 को बुलाए गए इंटरव्यू में आवेदन करने वाले 55 शिक्षकों में से 28 शामिल हुए। शिक्षा विभाग की कसौटी पर सिर्फ 6 खरे उतरे। मुंगेर में मौजूदा वक्त में 9 स्कूलों को मॉडल श्रेणी में अपग्रेड किया जा रहा है। एक स्कूल में 24-26 शिक्षकों की जरूरत है। ऐसे में कम से कम 216 शिक्षक चाहिए।

27 मई को हुई थी समीक्षा बैठक
शिक्षा विभाग ने 27 मई 2026 को आदर्श विद्यालयों (मॉडल स्कूल) को चलाने की समीक्षा की। इस दौरान यह पाया गया कि ज्यादातर स्कूलों में निर्धारित रिक्तियों के मुकाबले पर्याप्त शिक्षकों ने आवेदन नहीं किया है।
क्यों शिक्षकों की रुचि नहीं?
मॉडल स्कूलों में पढ़ाने के लिए क्यों शिक्षक रुचि नहीं ले रहे हैं। इस पर सीनियर जर्नलिस्ट और शिक्षाविद डॉ लक्ष्मीकांत सजल ने कहा, ‘इसकी वजह मॉडल स्कूल और सामान्य स्कूल के लिए पे-स्केल बराबर होना है। मॉडल स्कूल में पढ़ाने वालों के लिए नए और आकर्षक पे-स्केल की व्यवस्था नहीं की गई है। इन स्कूलों में ज्यादा काम करने की बात कही जा रही है।’
उन्होंने कहा, ‘मॉडल स्कूल में पढ़ाने के लिए आकर्षण पैदा करने के लिए सरकार को अलग पे-स्केल बनाना चाहिए। सामान्य और मॉडल स्कूल की सुविधाएं समान हैं तो कोई टीचर मॉडल स्कूलों में क्यों जाएगा जहां उसे ज्यादा मेहनत करनी होगी।’
टीचर नहीं मिलने पर शिक्षा विभाग ने जारी किया नया शेड्यूल
शिक्षक नहीं मिलने की स्थिति में शिक्षा विभाग ने नया शेड्यूल जारी किया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सभी जिलों को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है।
- अब शिक्षक मॉडल स्कूलों में नियुक्ति के लिए 1 से 4 जून के बीच आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद इन आवेदन की जांच और समीक्षा 5 से 7 जून 2026 तक होगी।
- शिक्षकों को इंटरव्यू के लिए 8 से 12 जून 2026 के बीच बुलाया जाएगा। चयनित शिक्षकों की लिस्ट 13 जून 2026 तक जारी होगी।
नए शिड्यूल से भी मॉडल स्कूलों में टीचर भरने पर शंका
शिक्षा विभाग ने मॉडल स्कूलों में टीचर बहाली के लिए नया शिड्यूल जारी किया है। इस शिड्यूल के तहत शिक्षक आवेदन करने में इंटरेस्ट लेंगे, इस पर संशय है।

मॉडल स्कूल के लिए कितने पद स्वीकृत हैं?
एक मॉडल स्कूल में कुल स्वीकृत पदों की संख्या 24 से 26 हो सकती है। क्लास 9-10 और 11-12 के लिए अलग-अलग पद मंजूर किए गए हैं। विशेष शिक्षकों की संख्या जरूरत के मुताबिक तय की गई है।
शिक्षा विभाग ने मॉडल स्कूल के तय पद के लिए कोई अलग से दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है। माध्यमिक (9-10) और उच्च माध्यमिक (11-12) के शिक्षकों की तैनाती को लेकर तत्कालीन शिक्षा निदेशक योगेंद्र सिंह ने 5 फरवरी 2025 को दिशा निर्देश जारी किए थे। इसी निर्देश के तहत मॉडल स्कूलों में पद तय किए जा रहें हैं।
क्लास 9-10 में कुल सैंक्शन पोस्ट 6-8
- सामाजिक विज्ञान-1
- गणित-1
- विज्ञान-1
- भाषा (हिंदी, इंग्लिश आदि)- 3
- विशेष शिक्षक- आवश्यकता अनुसार
- संगीत और डांस- 1
- फिजिकल टीचर-1
राजकीय, राजकीयकृत और प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय में अधिकतम 8 शिक्षकों का मानक बनाया गया है। विशेष शिक्षक को छोड़कर यह मानक तय है। उत्क्रमित और नवस्थापित उच्च माध्यमिक विद्यालय में यह संख्या मात्र 6 है। यह संख्या 60 बच्चों के अनुपात पर तय है।
उच्च माध्यमिक विद्यालय (11-12) में शिक्षकों के कुल सैंक्शन पदों की संख्या 14 से 16 है। राजकीय, राजकीयकृत और प्रोजेक्ट उच्च विद्यालय में अधिकतम 16 और उत्क्रमित और नवस्थापित उच्च माध्यमिक विद्यालय में यह संख्या 14 रखी गयी है। संख्या 60 बच्चों के अनुपात पर तय है।
11-12वीं क्लास के लिए शिक्षकों की संख्या
- साइंस- 4
- फिजिक्स-1
- केमिस्ट्री- 1
- मैथमेटिक्स-1
- बॉटनी और जूलॉजी-1
- 2. आर्ट्स- 8 विषय के लिए 4 शिक्षक
- विषय- इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र , समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, गृह विज्ञान और दर्शन शास्त्र
- 3. कम्प्यूटर-1
- 4. भाषा- 4
- सब्जेक्ट- 12 (हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत, भोजपुरी, मैथिली, अरबी, फारसी, प्राकृत, मगही, पाली और बंगला)
- 5. संगीत-1
- 6. कॉमर्स- 2
- सब्जेक्ट- अकाउंटेंसी, बिजनेस स्टडी और एंटरप्रेन्योरशिप

मॉडल स्कूलों में पढ़ाने के लिए कैसे किया जा रहा शिक्षकों का चयन?
मॉडल स्कूल में पढ़ाने के लिए शिक्षकों का चयन प्रत्येक जिला में पांच सदस्यीय कमेटी कर रही है। इसकी अध्यक्षता उप विकास आयुक्त (डीडीसी) कर रहे हैं। जिला शिक्षा पदाधिकारी को कमेटी के सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई।
कमेटी में तीन और सदस्य हैं। ये शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य, डीएम द्वारा नामित केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय या फिर सैनिक स्कूल के प्राचार्य हैं। डीएम द्वारा नामित महिला प्रतिनिधि को भी कमेटी में जगह दी गई है।
मॉडल स्कूलों में पढ़ाने की इच्छा रखने वाले शिक्षक ऑनलाइन आवेदन करते हैं। इसके बाद कमेटी उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाती है। शिक्षकों को अनुभव, शैक्षणिक योग्यता और इंटरव्यू में प्रदर्शन के आधार पर चुना जाता है। चयन 100 अंकों के मूल्यांकन पर आधारित है।
बिहार में कितने मॉडल स्कूल? बिहार के 534 ब्लॉक में 572 स्कूल को मॉडल रूप दिया जा रहा है। CM सम्राट चौधरी ने कहा है कि पटना जैसे बड़े जिला में मॉडल स्कूल की संख्या 10 रखी जाए। गया, दरभंगा, हाजीपुर, बिहारशरीफ जैसे नगर निगम क्षेत्र वाले शहर में मॉडल स्कूलों की संख्या 5-5 होगी।


