नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के ऐलान के 25 दिन बाद भी बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, किस पार्टी का होगा, किसी को पता नहीं है। राज्य में सत्ता ट्रांसफर की यह प्रक्रिया जितनी लंबी चल रही है, सस्पेंस गहराता जा रहा है। इस सस्पेंस को 29 मार्च को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफा टालने की घटना ने और बढ़ा दिया। सबसे बड़ा सवाल-क्या NDA में सब ठीक है। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। 4 पॉइंट में क्या NDA में सब ठीक नहीं… बीते 20-22 दिनों की गतिविधियों को देखें तो NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के अंदर सब ठीक नहीं लग रहा है। गठबंधन की दो बड़ी पार्टियां BJP-JDU के बीच अंदरखाने शह-मात का खेल चल रहा है। इसे 4 घटनाओं से समझिए… 1. काफी गहमागहमी के बाद नीतीश ने राज्यसभा जाने का ऐलान किया 16 मार्च को बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए वोटिंग होनी थी। 5 मार्च को नामांकन का आखिरी दिन था। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले पर अंदरखाने चर्चा है कि पहले नीतीश कुमार राज्यसभा जाने को तैयार नहीं थे। हां-ना में मामला फंसा था। जब मामला सेटल नहीं हो रहा था तब दिल्ली से मीडिया में खबर लीक की गई कि वह राज्यसभा जाएंगे। इसका प्रेशर उन पर पड़ा और काफी मंथन के बाद उनको ऐलान करना पड़ा। हालांकि, नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने के अपने फैसले को अपनी इच्छा बताया है। 2. मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस, JDU नेताओं की डिमांड-निशांत CM बनें नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के ऐलान के 25 दिन बाद भी यह पता नहीं है कि अगल मुख्यमंत्री कौन होगा और किस पार्टी का होगा। हालांकि, यह माना जा रहा है कि नीतीश के बाद भाजपा का CM होगा। जैसे-जैसे सत्ता ट्रांसफर का समय नजदीक आ रहा है-JDU के अंदर नीतीश के बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की डिमांड बढ़ रही है। सबसे पहले कांटी से JDU विधायक अजीत कुमार ने निशांत को मुख्यमंत्री बनाने की डिमांड की। हालांकि, नीतीश कुमार के बाद अगला मुख्यमंत्री भाजपा का ही होगा। इसमें कोई इफ-बट नहीं है। यह JDU की टॉप लीडरशिप को पता है। बस पूरा पेच भाजपा के मुख्यमंत्री चेहरे पर फंसा है। अंदरखाने चर्चा है कि नीतीश कुमार भाजपा के अंदर के अपने आदमी को मुख्यमंत्री बनवाना चाहते हैं। लेकिन RSS और भाजपा का बड़ा धड़ा इसके पक्ष में नहीं है। RSS का मानना है कि बिहार में पहली बार मुख्यमंत्री बनाने का मौका मिल रहा है। इसलिए नेता ऐसा हो, जो पार्टी की विचारधारा से गहरे से जुड़ा हो। इससे कार्यकर्ताओं में पॉजिटिव मैसेज जाएगा। नीतीश कुमार के पिछले पलटी मारने वाली घटना को लेकर भाजपा सचेत है। इसलिए वह जानबूझकर मुख्यमंत्री किस पार्टी का होगा, यह क्लियर करने में देर कर रही है। पार्टी चाहती है कि नीतीश खुद अपने से ऐलान करें। इसलिए वक्त लग रहा है। 3. CM पद कब छोड़ेंगे; क्लियर नहीं, मंत्री बोले-6 माह रह सकते नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा सदस्य चुन लिए गए। भाजपा नेता शिवेश राम के मुताबिक, 10 अप्रैल को बिहार के राज्यसभा सांसदों को शपथ दी लाई जाएगी। संभव है उस दिन नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य की शपथ ले सकते हैं। हालांकि, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद कब छोड़ेंगे इसको लेकर अब तक कोई तारीख सामने नहीं आई है। ऊपर से नीतीश सरकार में मंत्री श्रवण कुमार के बयान ने मामले को थोड़ा पेचिदा बना दिया है। श्रवण कुमार ने तय नियमों को हवाला देते हुए कहा कि नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद रहते हुए भी 6 महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते हैं। मतलब वह चाहे तो सितंबर तक CM पद पर रह सकते हैं। 4. नितिन नवीन का ऐन वक्त पर इस्तीफा का प्लान कैंसिल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 16 मार्च को राज्यसभा सदस्य चुन लिए गए। वह विधान सभा के सदस्य (MLA) हैं। MLA का कार्यकाल 2030 तक बचा है, लेकिन अब उनको 30 मार्च तक MLA पद छोड़ना होगा। अगर नहीं छोड़ेंगे तो उनकी राज्यसभा की सदस्यता अपने-आप खत्म हो जाएगी। नितिन नवीन के 29 मार्च के इस्तीफे का प्लान कैंसिल होने के बाद मुख्यमंत्री आवास में गहमागहमी बढ़ गई। शाम में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, मंत्री विजय कुमार चौधरी और मंत्री अशोक चौधरी, नीतीश कुमार से मिले। अंदरखाने मंथन के बाद शाम में सूचना आई कि 30 मार्च मतलब आज नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन दोनों विधानसभा/विधान परिषद से अपना इस्तीफा दे सकते हैं। भाजपा के लिए सरकार बनाना मुश्किल नहीं… दूसरे राज्यों के भाजपा के ट्रैक रिकार्ड को देखें तो बिहार में आज की तारीख में भाजपा चाहे तो बिना नीतीश कुमार के सरकार बना सकती है। भाजपा ने इसकी झलक राज्यसभा चुनाव में कम पड़े रहे विधायकों को मैनेज करके दिखा दी है। इसे ग्राफिक के जरिए समझिए… चिराग के दावे तेजस्वी से ज्यादा नीतीश के लिए चिंताजनक 17 मार्च को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, ‘सिर्फ RJD ही नहीं, बल्कि कांग्रेस में भी असंतोष बढ़ रहा है। राज्यसभा चुनाव में यह साफ दिखा, जब विपक्ष के कई विधायक वोटिंग से गायब रहे। कांग्रेस के आधे विधायक मतदान के लिए नहीं पहुंचे, जो अंदरूनी असंतोष का संकेत है। आने वाले दिनों में RJD में बड़ी टूट हो सकती है और कई विधायक हमारे संपर्क में हैं।’ चिराग के दावे अगर सही साबित हुए तो यह तेजस्वी से ज्यादा नीतीश कुमार के लिए चिंताजनक बात हो सकती है। नीतीश कुमार तब ही मजबूत हो सकते हैं जब तेजस्वी यादव के पास ज्यादा संख्या होगी। अन्यथा नीतीश को भाजपा की बात माननी ही पड़ेगी।
