पटना के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (LNJP) ट्रॉमा सेंटर में बहुप्रतीक्षित सर्जिकल सेवाओं की शुरुआत हो गई है। अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर को सक्रिय कर ट्रायल फेज में सर्जरी शुरू की है।
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इस पहल से सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों को ‘गोल्डन ऑवर’ (पहले एक घंटे) के भीतर समुचित इलाज मिलने की उम्मीद है। पहले ऐसे मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था, जिससे इलाज में देरी होती थी और जान का जोखिम बढ़ जाता था।

इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर को एक्टिव कर ट्रायल फेज में सर्जरी शुरू की गई।
मरीजों को अस्पतालों में भटकना नहीं पड़ेगा
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर में अब जनरल सर्जरी, न्यूरो सर्जरी और क्रिटिकल केयर जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं शुरू की जा रही हैं। दुर्घटना में घायल मरीजों को अक्सर सिर, छाती, पेट या आंतरिक अंगों में गंभीर चोटें आती हैं, जिनका इलाज अब यहीं संभव हो सकेगा।
इसके लिए अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सर्जनों के अलावा न्यूरो सर्जन, जनरल सर्जन और कार्डियक विशेषज्ञों की टीम उपलब्ध कराई जा रही है। इससे मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भटकना नहीं पड़ेगा और समय पर इलाज सुनिश्चित हो सकेगा।

शल्य चिकित्सा में स्थित आधुनिक मशीन।
एक दशक बाद मिली पूरी सुविधा
लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) ट्रॉमा सेंटर को शुरू हुए एक दशक से अधिक समय हो चुका है, लेकिन यह अब तक पूरी तरह क्रियाशील नहीं हो पाया था। पहले यहां मुख्य रूप से हड्डी (ऑर्थोपेडिक) से जुड़े मरीजों का ही इलाज होता था।
सिर या आंतरिक चोट वाले गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद पीएमसीएच, एनएमसीएच या आईजीआईएमएस जैसे बड़े संस्थानों में रेफर करना पड़ता था। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती थी, जब ट्रॉमा सेंटर शहर के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वीआईपी क्षेत्रों के करीब स्थित है।

क्या होना चाहिए और क्या है वास्तविक स्थिति
एक ट्रॉमा सेंटर में 24×7 मल्टी-स्पेशियलिटी डॉक्टरों की उपलब्धता, अत्याधुनिक इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट, ब्लड बैंक, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी त्वरित जांच सुविधाएं, प्रशिक्षित स्टाफ और एम्बुलेंस नेटवर्क होना जरूरी होता है।
LNJP की मौजूदा स्थिति अभी इन मानकों से काफी पीछे है। हालांकि, अत्याधुनिक उपकरणों से लैश ऑपरेशन थिएटर को चालू कर दिया गया है। बेसिक सर्जरी भी शुरू हो चुकी है, लेकिन कई जरूरी सुविधाओं की कमी अब भी बनी हुई है।
ICU की संख्या सीमित, वेंटिलेटर की सुविधा नहीं
अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सेवाएं अपेक्षाकृत बेहतर हैं, लेकिन आईसीयू की संख्या सीमित है और वेंटिलेटर की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है। यह गंभीर मरीजों के इलाज में बड़ी बाधा बन सकती है। इसके अलावा 24 घंटे सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो पाई है।
रेडियोलॉजी सेवाएं पूरी तरह से एकीकृत नहीं हैं, जिससे जांच में देरी हो सकती है। ट्रॉमा में ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ की भी कमी है। सबसे बड़ी चिंता ब्लड बैंक की अनुपस्थिति है, जो किसी भी ट्रॉमा सेंटर के लिए अत्यंत आवश्यक सुविधा मानी जाती है।

LNJP ट्रॉमा सेंटर।
300 बेड का नया भवन, लेकिन लक्ष्य अधूरा
अस्पताल के विस्तार के तहत 300 बेड के नए भवन का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इस योजना में ट्रॉमा और मल्टी-स्पेशियलिटी सेवाओं को एकीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही आधुनिक आईसीयू, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और उन्नत डायग्नोस्टिक ब्लॉक विकसित करने की भी योजना है।
हालांकि, यह परियोजना अभी धीमी गति से आगे बढ़ रही है और इसे तैयार होने में वक्त लग सकता है। ऐसे में वर्तमान व्यवस्थाओं को मजबूत करना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।
ट्रायल फेज के सकारात्मक संकेत, लेकिन चुनौतियां बरकरार
ट्रायल फेज के दौरान 25 सफल ऑपरेशन किए जाना एक सकारात्मक संकेत है, जो यह दर्शाता है कि ट्रॉमा सेंटर धीरे-धीरे अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ट्रायल के दौरान सामने आई छोटी-मोटी समस्याओं को लगातार दूर किया जा रहा है।
निदेशक के अनुसार, लक्ष्य यह है कि दुर्घटना के शिकार हर मरीज को तत्काल और संपूर्ण इलाज उपलब्ध कराया जाए और उसे पूरी तरह स्वस्थ कर ही अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाए।

पटना के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल। (फाइल फोटो)
उम्मीदें जगीं, लेकिन सुधार की जरूरत
LNJP ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी सेवाओं की शुरुआत निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि है और इससे पटना के मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर इलाज मिलना कई जिंदगियों को बचा सकता है।
हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी भी कई कमियां मौजूद हैं, जिन्हें दूर किए बिना इस व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी नहीं बनाया जा सकता। अगर प्रशासन इन चुनौतियों को समय रहते दूर कर लेता है, तो LNJP ट्रॉमा सेंटर वास्तव में राजधानी के लिए एक जीवनरक्षक संस्थान साबित हो सकता है।
