रांची17 घंटे पहले
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कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (सीएमपीएफओ) के धनबाद हेडक्वार्टर में 3.64 करोड़ रुपए का पेंशन घोटाला पकड़ में आया है। इसे सीएमपीएफओ के ही चार अफसरों ने अंजाम दिया। इन अफसरों ने अन्य की मिलीभगत से रिटायर्ड व मृत कोयलाकर्मियों की पेंशन हड़पने के लिए बैंकों में जाली कागजात के आधार पर खाते खुलवाए और फिर उनमें मासिक पेंशन व पूर्व की एकमुश्त एरियर राशि भेजकर पूरी रकम की निकासी कर ली।
ऐसे कोयलाकर्मियों की संख्या 142 है, जिनके नाम पर गोरखधंधा किया गया। इनमें से 127 कर्मियों की मौत हो चुकी है। मृत कर्मियों के फर्जी आश्रित खड़े कर पेंशन की गलत तरीके से प्रोसेसिंग पूरी की गई।
वहीं 15 रिटायर्ड कर्मियों के नाम पर फर्जी ढंग से पेंशन स्कीम का आवेदन देकर जालसाजी की गई। सीएमपीएफओ के चीफ विजिलेंस ऑफिसर को इस बाबत लिखित शिकायत मिली थी। सीवीओ की आंतरिक जांच में इसकी पुष्टि हुई कि जिन कर्मियों की मौत हो गई या जिन रिटायर्ड कामगारों ने पेंशन का आवेदन नहीं किया, उनके नाम पर ही इतनी बड़ी राशि हड़पी गई।
जांच के बाद सीवीओ ने इस बाबत एक रिपोर्ट धनबाद सीबीआई को भेज प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह किया। इसी रिपोर्ट पर सीबीआई ने गुरुवार को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ये हैं घोटाले के मास्टरमाइंड:
- अचिंत्य कुमार, सेक्शन ऑफिसर, सीएमपीएफ हेडक्वार्टर, धनबाद में तैनात।
- दीप कुमार, तत्कालीन सीनियर एसएसए। वर्तमान में तालचर क्षेत्रीय कार्यालय, ओडिशा में सेक्शन ऑफिसर के रूप में तैनात।
- अजय कुमार सिन्हा, सेक्शन ऑफिसर, सीएमपीएफओ हेडक्वार्टर, धनबाद में तैनात।
- मंजीत कुमार, सीनियर एसएसए, सीएमपीएफओ हेडक्वार्टर, धनबाद में तैनात।
- सीएमपीएफ के धनबाद हेडक्वार्टर में मार्च 2016 से दिसंबर 2016 तक तैनात अज्ञात अधिकारी-कर्मचारी।
पेंशन स्कीम में जिनका आवेदन नहीं, उनके नाम पर खोले खाते:
वर्ष 1998 में वर्कर्स पेंशन स्कीम लॉन्च हुई। 1998 से 2001-02 के बीच कई कोयला कर्मी रिटायर हुए। 142 कर्मी जानकारी के अभाव में स्कीम का लाभ नहीं ले सके। बाद में कई की मौत हो गई। घोटाले की नींव मार्च 2015 में पड़ी। सीएमपीएफ के आरोपी सेक्शन अफसरों और सीनियर एसएसए ने उन रिटायर्ड व मृत कामगारों की सूची देखी, जिन्होंने पेंशन नहीं ली थी।
इसके बाद फर्जी रिटायर्ड कामगार व आश्रित खड़े कर रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया। उनके नाम पर फर्जी पेंशन दावे कर बैंक खाते खुलवाए गए। इनमें मासिक पेंशन के साथ 12-13 साल की ₹3,64,48,052 एरियर राशि जमा कराई गई। बिचौलियों को कमीशन देकर रकम हड़प ली।

