रांची12 घंटे पहले
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बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के पानीपड़ा-नागुड़साई स्थित स्वर्णरेखा नदी के तट पर दूसरी बार मिले विशालकाय बम (करीब 227 किलोग्राम) ने इलाके में फिर से दहशत का माहौल बना दिया है। कई दिनों से ग्रामीण भय के साए में जी रहे हैं। सूचना मिलने के बाद भारतीय सेना की विशेष टीम मौके पर पहुंची और बम का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया।

सूचना मिलने के बाद भारतीय सेना की विशेष टीम मौके पर पहुंची और बम का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया।
सेना की टीम ने प्रारंभिक जांच के बाद पूरे मामले की रिपोर्ट संबंधित विभाग को भेजने की बात कही। रिपोर्ट के आधार पर ही बम को निष्क्रिय (डिफ्यूज) करने की अंतिम प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि,विस्फोट कब किया जाएगा, इसे लेकर अभी तककोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है।
पहले भी मिल चुके हैं बम, सेना कर चुकी है डिफ्यूज
गौरतलब है कि इससे पहले 17 मार्च को भी इसी क्षेत्र में मिले दो बम को बहरागोड़ा पुलिस की पहल पर सेना की टीम ने सफलतापूर्वक डिफ्यूज किया था। उस दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए 10 वाय 10 फीट के दो गड्ढे खोदे गए थे। बम को बालू से भरे बोरों से ढककर सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया गया था।

सेना की टीम इस बार भी उसी प्रक्रिया के तहत बम को निष्क्रिय करने की तैयारी में जुट गई है। बम की मापी की गई। तय किया गया कि गड्ढा कितना बड़ा खोदा जाएगा।
इस बार भी वही प्रक्रिया अपनाने की तैयारी
सेना की टीम इस बार भी उसी प्रक्रिया के तहतबम को निष्क्रिय करने की तैयारी में जुट गई है। रविवार को बम की मापी की गई और यह तय किया गया कि गड्ढा कितना बड़ा खोदा जाएगा। इसके साथ ही बालू से भरे बोरों की व्यवस्था और अन्य सुरक्षा उपायों की योजना बनाई जा रही है। अब अगले चरण में गड्ढा खोदने और सुरक्षा घेरा तैयार करने का काम शुरू होगा। इसके बाद ही बम को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ग्रामीणों में भय, प्रशासन सतर्क
लगातार दूसरी बार इतने बड़े बम की बरामदगी से आसपास के गांव में दहशत का माहौल है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की अपील की है और सुरक्षा बलों की निगरानी बढ़ा दी गई है।

बहरागोड़ा और चाकुलिया का क्षेत्र द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के दौरान ब्रिटिश-अमेरिकी एयरफोर्स (यूएसएएफ) का एक प्रमुख बेस था।
द्वितीय विश्व युद्ध में यूएसएएफ का प्रमुख बेस था चाकुलिया
बहरागोड़ा और चाकुलिया का क्षेत्र द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के दौरान ब्रिटिश-अमेरिकी एयरफोर्स (यूएसएएफ) का एक प्रमुख बेस था। अमेरिकी सैन्य दस्तावेजों के मुताबिक, चाकुलिया और बहरागोड़ा के इलाके में 1942-43 के दौरान ‘बी-29 सुपरफोर्ट्रेस’ जैसे भारी बमवर्षक विमानों के लिए हवाई पट्टियां बनाई गई थीं।
द्वितीय युद्ध में चाकुलिया और आसपास के क्षेत्रों का उपयोग बमों के भंडारण, ईंधन डिपो और मरम्मत केंद्र के रूप में किया जाता था। युद्ध समाप्त होने के बाद बड़ी मात्रा में अप्रयुक्त गोला-बारूद को नष्ट करने या सुरक्षित रूप से जमीन में दबाने या नदी में विसर्जित करने के निर्देश थे। ————————————————————————- इसे भी पढ़ें.…
जिंदा बम के साथ फोटो खींचा रहे लोग:बहरागोड़ा सुवर्णरेखा घाट पर मिला है 227 किलो का बम, अब तक नहीं हुआ डिफ्यूज

पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड के बरागाड़िया पंचायत अंतर्गत पानीपड़ा-नागुड़साई स्थित सुवर्णरेखा नदी घाट पर मिले संदिग्ध जिंदा बम को निष्क्रिय करने के लिए अब तक कोई तकनीकी दस्ता मौके पर नहीं पहुंचा है। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई में हो रही देरी से स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इतनी संवेदनशील स्थिति के बावजूद घटनास्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। बम के आसपास किसी तरह की घेराबंदी नहीं होने के कारण लोग बेखौफ होकर उसके करीब पहुंच रहे हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…



