Quote of the day 26 August 2026, chanakya niti: आचार्य चाणक्य ने अपने ग्रंथ नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति का सच्चा मित्र कौन होता है। आइए जानते हैं आज की चाणक्य नीति।
Quote of the day 26 August 2026, आज की चाणक्य नीति: आचार्य चाणक्य को महान दूरदर्शी, राजनीतिज्ञ और कूटनीतिज्ञ माना जाता है। कहा जाता है कि चाणक्य ने अपनी नीतियों के बल पर ही एक साधारण बालक चंद्रगुप्त को मौर्य वंश का सम्राट बनाया था। चाणक्य की नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं। कहा जाता है कि इन नीतियों को अपनाना मुश्किल होता है, लेकिन जिसने भी अपना लिया उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सका है। एक नीति में चाणक्य ने धन यानी पैसा उसकी रक्षा और उसके सही इस्तेमाल को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति का सच्चा मित्र धन है, जो विपत्ति या विपरीत परिस्थिति में काम आता है।
श्लोक:
आपदर्थे धनं रक्षेद्दारान् रक्षेद्धनैरपि।
आत्मानं सततं रक्षेद्दारैरपि धनैरपि॥
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य के अनुसार, आजीविका और संकट के लिए धन की रक्षा या बचत करनी चाहिए। पत्नी हमेशा रक्षा धन देकर भी करनी चाहिए। लेकिन बात अपने सम्मान या जीवन पर आए तो उसकी रक्षा हमेशा धन और पत्नी दोनों से बढ़कर करनी चाहिए।
श्लोक की सीख:
इस श्लोक के माध्यम से यह सीख मिलती है कि व्यक्ति को मुश्किल समय के लिए हमेशा बचत करनी चाहिए।
कमाए हुए धन का सच्चा सदुपयोग:
श्लोक:
उपार्जितानां वित्तानां त्याग एव हि रक्षणम्।
तडागोदरसंस्थानां परीवाह इवाम्भसाम्॥
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य कहते हैं कि जिस तरह से पानी को सड़ने से बचाने के लिए उसका निकास यानी बाहर निकलना जरूरी है। उसी प्रकार से कमाए गए धन की रक्षा दान और सही कार्यों में उसका इस्तेमाल करने से ही होती है।
श्लोक की सीख:
चाणक्य के अनुसार, केवल धन को जमा करके नहीं रखना चाहिए। बल्कि उसका सही निवेश और दान भी करना चाहिए। वरना इस तरह का धन नष्ट हो सकता है।
गलत तरीके से कमाए धन का होता है ये परिणाम:
श्लोक:
अन्यायोपार्जितं द्रव्यं दश वर्षाणि तिष्ठति।
प्राप्ते चैकादशे वर्षे समूलं तद् विनश्यति॥
श्लोक का अर्थ:
चाणक्य कहते हैं कि गलत तरीके या अधर्म के रास्ते से कमाया गया धन केवल 10 वर्ष तक ही टिकता है। 11वें वर्ष यह पूरी तरह से नष्ट होने लगता है। कहा जाता है कि धोखाधड़ी से कनाया गया धन 10 साल बाद ब्याज और मूलधन के साथ धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है।
धन क्यों है जरूरी है:
आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक के माध्यम से धन की महत्ता का वर्णन किया है और बताया है कि आखिर धन क्यों हर व्यक्ति के लिए जरूरी होता है। चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति का आर्थिक रूप से सक्षम होना अनिवार्य है। जिस व्यक्ति के पास धन का अभाव होता है, समाज में लोग उसे हीन भावना से देखते हैं। चाणक्य कहते हैं कि जिसके पास धन होता है उसे गुणी, ज्ञानी और विद्वान माना जाता है।
