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Ranchi Student Releases Govt Procurement Data

रांची के जेवीएम श्यामली के कक्षा 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने एक बार फिर अपनी पहल से सबका ध्यान खींचा है। सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन टेंडर का विश्लेषण कर पहले ही चर्चा में आ चुके सार्थक ने इस बार भारत सरकार के केंद्रीय सार्वजनिक खरीद (सीपीपी) प

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खास बात यह है कि यह पूरा डेटा उन्होंने अपने पोर्टल sarthaksiddhant.com पर अपलोड किया है, जहां से कोई भी व्यक्ति इसे देख और डाउनलोड कर सकता है। सार्थक का कहना है कि सरकारी खरीद से जुड़े दस्तावेज हर नागरिक के लिए सुलभ होने चाहिए, ताकि पारदर्शिता केवल कागजों तक सीमित न रहे।

सार्थक ने पोर्टल sarthaksiddhant.com पर सरकारी खरीद का डेटा अपलोड किया है

सार्थक ने पोर्टल sarthaksiddhant.com पर सरकारी खरीद का डेटा अपलोड किया है

ज्यादा लोग करेंगे जांच तो बढ़ेगी जवाबदेही

सार्थक ने बताया कि पिछले दो सप्ताह में उन्होंने सीपीपी पोर्टल से यह डेटा एकत्र किया। इसके बाद इसे व्यवस्थित कर अपने पोर्टल sarthaksiddhant.com पर उपलब्ध कराया। उन्होंने नागरिकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं से अपील की है कि वे इस डेटा को डाउनलोड कर खुद भी इसकी जांच करें।

उनका मानना है कि जब अधिक लोग सरकारी खर्च और खरीद से जुड़े रिकॉर्ड का विश्लेषण करेंगे, तो इससे सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेगी। सार्थक के अनुसार, यह पहल सार्वजनिक निगरानी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।

उन्होंने नागरिकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं से अपील की है कि वे इस डेटा को डाउनलोड कर खुद भी इसकी जांच करें।

उन्होंने नागरिकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं से अपील की है कि वे इस डेटा को डाउनलोड कर खुद भी इसकी जांच करें।

सीपीपी पोर्टल जटिल, अपने प्लेटफॉर्म को बनाया आसान

सार्थक के मुताबिक भारत सरकार का केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल काफी जटिल है, जहां से डेटा डाउनलोड करना आम लोगों के लिए आसान नहीं है। इसी वजह से उन्होंने अपने वेबसाइट को सरल और यूजर फ्रेंडली बनाया है।

यहां से लोग बिना किसी तकनीकी दिक्कत के रिकॉर्ड डाउनलोड कर सकते हैं। उनका स्वतंत्र विश्लेषण कर सकते हैं। इस डेटाबेस में विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों की खरीद से जुड़ी जानकारी शामिल है। उन्होंने बताया कि आगे इस पोर्टल को और बेहतर बनाने के लिए इंजीनियरों की टीम भी तैयार की जा रही है।

सार्थक इससे पहले सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर सवाल उठा चुके हैं।

सार्थक इससे पहले सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर सवाल उठा चुके हैं।

सीबीएसई के डिजिटल मूल्यांकन पर उठाए थे सवाल

गौरतलब है कि सार्थक इससे पहले सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली और 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन को लेकर सवाल उठा चुके हैं। अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी देखने के बाद उन्हें अंकों में अंतर महसूस हुआ था।

जिसके बाद उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की थी। उनके इस विश्लेषण को व्यापक स्तर पर सराहा गया था। अब सरकारी खरीद के 1.66 करोड़ रिकॉर्ड को वेबसाइट के जरिए सार्वजनिक कर उन्होंने एक बार फिर पारदर्शिता की दिशा में बड़ी पहल की है।

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भास्कर इंटरव्यू : ‘कम नंबर आए तो जानना चाहता था ऐसा क्यों हुआ’:इनसिक्योर प्लेटफॉर्म को टेंडर क्यों दिया; सार्थक के खुलासे से CBSE चेयरमैन की कुर्सी गई

सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम में जब कॉपियां धुंधली दिखने और चेकिंग में गड़बड़ी की शिकायतें आईं। इसके बाद रांची के 17 साल के छात्र सार्थक सिद्धांत ने सिर्फ शिकायत ही नहीं की, बल्कि सिस्टम की ही पोल खोल दी।

12वीं (2024-26 बैच) के इस छात्र ने सीबीएसई के 576 टेंडर दस्तावेजों को खंगाला और एक ब्लॉग के जरिए ओएसएम का ठेका देने की प्रक्रिया में हुई भारी अनियमितताओं को उजागर कर दिया।

सार्थक के इस खुलासे की गूंज संसद तक पहुंची। स्थायी समिति ने मामले पर संज्ञान लिया। इसके बाद सरकार को सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को पद से हटाना पड़ा। यहां पढ़ें पूरी खबर…

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