राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या सिंगापुर से लौटीं तो उस मामा साधु यादव के घर गईं, जिनकी एंट्री लालू परिवार या उनकी पार्टी राजद में बंद है।
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पिछली बार रोहिणी राबड़ी आवास से काफी नाराज होकर सिंगापुर गई थीं। आरोप लगाया था कि मायके में गलत व्यवहार किया गया। गालियां दी गई, चप्पल उठाए गए। परिवार से निकाल दिया गया।
रोहिणी ने आरोप लगाया था कि तेजस्वी यादव के सलाहकार और राज्यसभा सांसद संजय यादव व करीबी रमीज नेमत खान 2025 विधानसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। पार्टी में बाहरी लोगों का प्रभाव बढ़ गया है।
इन मुद्दों पर भास्कर ने लालू यादव के साला और रोहिणी के मामा साधु यादव से बात की।
सवाल: रोहिणी आचार्या नाराज होकर गईं, सिंगापुर से वापस आईं तो आपके पास, क्या बातें हुईं?
जवाब: वह तो भगिनी है, बेटी के समान है। चुनाव के बाद आई है। फोन किया था। बोली कि मामा मैं आपके घर आऊंगी। मैंने कहा कि आ जाओ, कोई दिक्कत नहीं है।
वह आई खाना भी खाई और बोली कि फिर एक दिन आएंगे। हम बोले, ठीक है आओ। कोई पॉलिटिकल बात नहीं हुई। घरेलू बातचीत हुई।

पिछले दिनों रोहिणी अपने मामा साधु यादव से मिलने उनके घर गईं।
सवाल: वह पिछली बार राबड़ी आवास से बहुत नाराज होकर गई थीं?
जवाब: हां सही बोल रहे हैं। इस समय भी हम इस पर बोले थे कि तुम्हारे साथ किसी ने भी गलत व्यवहार किया तो ठीक नहीं किया है। चाहे वह जो भी हो।
वह बाहरी व्यक्ति क्यों न हो। बाहरी व्यक्ति की हिम्मत कैसे हो गई हमारे परिवार के किसी सदस्य पर उंगली उठाने की?
सवाल: इस व्यवहार से पार्टी को भी नुकसान हुआ?
जवाब: पार्टी को तो काफी नुकसान हुआ है। पार्टी लगातार चुनाव हारी है। एक एमएलसी चुनाव आरा में जीती, लेकिन विधानसभा चुनाव से लेकर उपचुनाव हार गई।

15 नवंबर 2025 को रोहिणी राबड़ी आवास से निकली थीं। पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से कहा था कि मेरा कोई परिवार नहीं है।
सवाल: लालू यादव ने तेजस्वी को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। सब अधिकार दे दिए?
जवाब: वह ठीक है। हम तो कह रहे हैं कि बिहार के लोगों के बारे में सोचना है। बिहार के बारे में सोचना है तो बिहारी बनकर सोचना होगा। बाहरी बनकर काम करना है तो बिहार के बारे में सोचना बेकार है।
सवाल: क्या राजद में बदलाव की जरूरत है, रोहिणी पार्टी ठीक से देख सकती हैं?
जवाब: क्यों नहीं देख सकती हैं रोहिणी आचार्या। खूब बढ़िया से देख सकती हैं। लेकिन हमारा कहना उचित इसलिए नहीं होगा कि लालू प्रसाद राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने पार्टी का काम देखने के लिए तेजस्वी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है।

सवाल: आप ये बोल रहे हैं कि रोहिणी आचार्या को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है? जवाब: ये हम कैसे बोलेंगे, हम राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं हैं। हम न पार्टी में हैं न उनके घर में।
सवाल: आपकी वापसी को लेकर बात नहीं होती है? जवाब: न लालू प्रसाद न बहन राबड़ी से पार्टी के बारे में बात होती है। भगिना, भगिनी से तो कोई ऐसी बात करने का सवाल ही नहीं है।
गार्जियन को लगे कि साधु यादव को आरजेडी में आना चाहिए तो हम सोच सकते हैं। बाकी किसी के कुछ बोलने का कोई मतलब नहीं है।
सवाल: चर्चा है कि लालू परिवार के सदस्यों पर IRCTC मामले में कार्रवाई हुई तो रोहिणी आचार्या पार्टी संभाल सकती हैं?
जवाब: इस पर हम क्यों कुछ बोलें, हम कुछ नहीं बोल सकते। हां यह जरूर है कि किसी के चढ़ाने-बढ़ाने पर तेजस्वी ने जो कुछ किया उसका नुकसान ही नुकसान हो रहा है।
सरकार भी चली गई, नीतीश कुमार ने भी अब साथ नहीं रखा। इसके दोषी वे सभी लोग हैं जो अभी तेजस्वी के साथ हैं।
हमारा साथ छोड़ने के बाद लालू प्रसाद सत्ता में आए ही नहीं। 20 साल नीतीश कुमार सत्ता में रहे। नीतीश के साथ कुछ समय तेजस्वी सत्ता में लौटे और डिप्टी सीएम बने।

सवाल: आपके साथ जो हुआ सो हुआ, तेजप्रताप और रोहिणी के साथ जो कुछ हुआ वह कितना सही है?
जवाब: लालू प्रसाद के साथ रहकर कुछ लोगों ने हमारे साथ षड्यंत्र किया था। बिल्कुल उसी तरह की हालात तेजप्रताप यादव और रोहिणी आचार्या के साथ राजद में की गई।
सवाल: आरजेडी की पॉलिटिकल गतिविधियों से आप कितने संतुष्ट हैं?
जवाब: आरजेडी की राजनीति सबके सामने है। हम तो इस बारे में कई बार बोल चुके हैं कि पार्टी में सुधार लाओगे तो सीएम बनोगे।
सवाल: आप तेजस्वी यादव को सलाह दे रहे हैं?
जवाब: हां तेजस्वी को सलाह दे रहे हैं। हम कह रहे हैं कि तेजस्वी खुद में सुधार लाएंगे तभी पार्टी चल पाएगी और उसका सपना पूरा हो पाएगा।
बहुत तरह के लोग उसकी घेराबंदी करके रखे हुए हैं। जनता का मिलना-जुलना मुश्किल है। जिसको कोई नॉलेज नहीं है, किसी प्रकार की जानकारी नहीं है, उन लोगों से तेजस्वी घिरे हुए हैं। कौन उनके अपने और कौन पराए हैं, इसकी समझ नहीं हो पा रही है।
सवाल: बिहार में अभी MLC चुनाव हो रहा है। किसका पलड़ा भारी रहेगा, आपको क्या लगता है?
जवाब: अभी हो रहे एमएलसी चुनाव में ग्रेजुएट और टीचर वोटर हैं। जो उम्मीदवार वोटर बनवाते हैं, वही चुनकर जाते हैं।
सवाल: किसका पलड़ा भारी रहेगा? प्रशांत किशोर भी जोर लगा रहे हैं?
जवाब: जो उम्मीदवार ज्यादा वोटर बनाया होगा, वह जीतेगा। हार-जीत उसी से तय होगी। जिसने कम वोटर बनवाया होगा वह हारेगा। पार्टी की जीत-हार नहीं होती। पार्टी सिम्बॉलिक लिस्ट जारी करती है।

1 अक्टूबर को रोहिणी पटना आईं। उन्हें एयरपोर्ट पर रिसीव करने लालू यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती पहुंचे। रोहिणी ने कहा कि पापा ने बुलाया तो उनसे मिलने आ गई।
सवाल: जेडीयू के अंदर भी पावर वार चल रहा है?
जवाब: जेडीयू के अंदर जो पावर वार चल रहा है वह दो व्यक्तियों के अंदर का है। पार्टी में झंझट नहीं है। एक व्यक्ति से एक व्यक्ति का झंझट है। इसमें अनुशासन का कोई सवाल नहीं है।
सवाल: अनंत सिंह भी जेडीयू की बात नहीं मान रहे हैं?
जवाब: अनंंत सिंह ताकतवर आदमी हैं। मजबूत आदमी हैं, वे कैसे बात मानेंगे।
सवाल: पार्टी लाइन भी तो कोई चीज होती है?
जवाब: हम तो पहले ही बोले कि पार्टी लाइन पर चुनाव नहीं होता। अनंत सिंह भी यही बात बोल रहे हैं। अनंत सिंह का उम्मीदवार भी मजबूत आदमी है। कोई कमजोर आदमी नहीं है।
