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Sankashti Chaturthi 2026:6 या 7 मार्च कब है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी? जानें पूजा विधि और चंद्रोदय का समय – Bhalachandra Sankashti Chaturthi March 2026 Date Shubh Muhurat Moon Rise Time


Bhalachandra Sankashti Chaturthi March 2026 Date: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं कि यह व्रत किस दिन रखा जाए और चतुर्थी तिथि पर चंद्रोदय का सही समय क्या रहेगा।

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कब है? 

दृक पंचांग के अनुसार, चैत्र कृष्ण चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 मार्च, शुक्रवार को शाम 05:53 बजे से होगी और इसका समापन 7 मार्च, शनिवार को शाम 7:17 बजे होगा। संकष्टी चतुर्थी व्रत में यह नियम है कि चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान होनी चाहिए, क्योंकि व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है। चंद्रोदय 6 मार्च की रात में होगा और उस समय चतुर्थी तिथि रहेगी, इसलिए व्रत 6 मार्च को ही रखा जाएगा।

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Bhalachandra Sankashti Chaturthi March 2026 Date shubh muhurat moon rise time

चतुर्थी पर भद्रा का प्रभाव
– फोटो : freepik


चतुर्थी पर भद्रा का प्रभाव

इस दिन भद्रा काल सुबह 6:41 बजे से शुरू होकर शाम 5:53 बजे तक रहेगा। हालांकि, इस भद्रा का वास पाताल लोक में बताया गया है, इसलिए पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं मानी जाएगी।


Bhalachandra Sankashti Chaturthi March 2026 Date shubh muhurat moon rise time

चंद्रोदय का समय
– फोटो : Adobe


चंद्रोदय का समय

संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा के उदय की प्रतीक्षा रहती है, क्योंकि इसी के बाद व्रत का पारण किया जाता है। 6 मार्च को चंद्रोदय रात 9:14 बजे होगा। कुछ पंचांगों के अनुसार चांद लगभग 9 बजकर 31 मिनट पर दिखाई देना शुरू हो सकता है।

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Bhalachandra Sankashti Chaturthi March 2026 Date shubh muhurat moon rise time

व्रत और पूजा विधि
– फोटो : freepik


व्रत और पूजा विधि

  • भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 
  • पूजा स्थान की सफाई कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • गणेश जी को हल्दी, रोली और अक्षत से तिलक करें और दीपक जलाकर पुष्प, माला अर्पित करें। 
  • पूजा के दौरान श्रद्धा भाव से “ॐ भालचंद्राय नमः” मंत्र का जाप करें और संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें। 


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Ganesh Chaturthi
– फोटो : freepik


  • दूर्वा, मोदक और लड्डू का भोग लगाएं और अंत में कपूर से आरती करें।
  • शाम के समय पुनः पूजा करें, दीप प्रज्वलित करें और चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करें। 
  • इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर सात्विक भोजन के साथ व्रत का पारण करें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।


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