कटिहार के प्राणपुर प्रखंड में एसडीएम प्रद्युम्न कुमार यादव ने लाभा जीरो माइल चौक स्थित आरोग्यम अस्पताल, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी सेंटर को सील कर दिया। जांच में इन केंद्रों को अवैध पाए जाने के बाद शनिवार देर शाम यह कार्रवाई की गई। छापेमारी की भनक लगते ही नर्सिंग होम का संचालक और भवन मालिक मौके से फरार हो गए। एसडीएम यादव ने बताया कि वे शनिवार शाम सरकारी काम से प्राणपुर के रास्ते गुजर रहे थे, तभी उनकी नजर आरोग्यम अस्पताल के बोर्ड पर पड़ी। संदेह होने पर उन्होंने जांच का निर्णय लिया। वैध पंजीकरण नहीं होने पर कार्रवाई अस्पताल में दाखिल होने पर जांच शुरू की गई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। आरोग्यम अस्पताल के पास क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत कोई वैध पंजीकरण नहीं था। अल्ट्रासाउंड मशीन भी पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत पंजीकृत नहीं पाई गई। पैथोलॉजी लैब में न तो कोई योग्य पैथोलॉजिस्ट मौजूद था और न ही किसी टेक्नीशियन का प्रमाण पत्र मिला। इसके अतिरिक्त, भर्ती मरीजों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया था और अस्पताल में एक्सपायरी डेट की दवाएं भी मिलीं। ओपीडी और अल्ट्रासाउंड रूम को किया सील एसडीएम के निर्देश पर तत्काल सभी ओपीडी, वार्ड, लैब और अल्ट्रासाउंड रूम को सील कर दिया गया। पुलिस ने अस्पताल से मशीनें, रजिस्टर और दवाएं जब्त कर ली हैं। रोशना थाना में क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट और बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, प्राणपुर बाजार और जीरो माइल के आसपास एक दर्जन से अधिक नर्सिंग होम बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे हैं। ये केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों से मोटी रकम वसूलते हैं। एसडीएम की इस कार्रवाई के बाद अवैध क्लीनिक संचालकों में हड़कंप मच गया है, और कई ने शनिवार रात ही अपने बोर्ड हटाने शुरू कर दिए। अवैध संस्थानों पर लगाया जाएगा ताला
मामले की जानकारी मिलने पर डीएम आशुतोष द्विवेदी ने सिविल सर्जन को जिले भर के निजी अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी सेंटरों का सत्यापन करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि 15 दिन का विशेष अभियान चलाकर अवैध संस्थानों पर ताला लगाया जाएगा। मरीजों को किया गया रेफर सील किए गए आरोग्यम अस्पताल में भर्ती दो मरीजों को एंबुलेंस से पीएचसी प्राणपुर भेजा गया। एसडीएम ने अपील की कि लोग इलाज के लिए सिर्फ निबंधित अस्पतालों में ही जाएं। किसी भी अवैध क्लीनिक की सूचना अनुमंडल कार्यालय या टोल फ्री नंबर 104 पर दें। प्रशासन ने साफ किया है कि झोलाछाप डॉक्टरों और फर्जी लैब से लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।

