रांची20 घंटे पहलेलेखक: अमरेंद्र कुमार
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ट्रेजरी घोटाले की जांच के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनी एसआईटी बोकारो के बाद अब हजारीबाग एसपी ऑफिस से हुए वेतन भुगतान का पूरा रिकॉर्ड खंगालेगी।
इसके लिए वित्त विभाग ने हजारीबाग एसपी ऑफिस से वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक के वेतन, बकाया वेतन, टीए और कंटीजेंसी मद से हुई निकासी से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी है।
जांच के दायरे में केवल भुगतान की रकम ही नहीं, बल्कि किसने पेयी आईडी बनाई, किस लॉगिन से बिल पास हुआ, किस बैंक खाते में राशि गई और संबंधित कर्मचारी वास्तव में पुलिस बल में पदस्थापित था या नहीं, इन सभी बिंदुओं को शामिल किया गया है। रिपोर्ट मिलते ही एसआईटी टीम जांच के लिए हजारीबाग जाएगी।
इसके अलावा हजारीबाग ट्रेजरी के उन पदाधिकारियों, लेखापालों और विपत्र लिपिकों की जानकारी भी मांगी है, जो इस डीडीओ कोड से जुड़े पे-बिल के पारित होने की प्रक्रिया में शामिल थे।
उनके लॉगिन का विवरण भी मांगा गया है। इससे डिजिटल ट्रेल के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि बिल तैयार करने, संशोधित करने और भुगतान की प्रक्रिया में किस यूजर लॉगिन का इस्तेमाल हुआ।
कहा जा रहा है कि एसआईटी की जांच अब सिर्फ कितनी राशि निकली तक सीमित नहीं रहेगी। फोकस इस बात पर भी रहेगा कि पेयी आईडी किसने बनाई, किसके नाम पर बनाई, बैंक खाते का वास्तविक मालिक कौन था, बिल किसने पास किया और कुबेर पोर्टल पर भुगतान के समय किस लॉगिन का इस्तेमाल हुआ।
दस्तावेज में मांगी गई सूचनाओं से जांच का दायरा वित्तीय लेन-देन के साथ-साथ पूरे डिजिटल और प्रशासनिक ट्रेल पहुंचेगा।
वित्त विभाग ने 2017-18 से 2025-26 तक के हर वित्तीय वर्ष के पांच-पांच वेतन व बकाया वेतन विपत्र की कार्यालय प्रति मांगी है। साथ ही 2017-18 से 2025-26 तक के टीए विपत्रों और प्रत्येक वित्तीय वर्ष के निर्धारित कंटिंजेंसी विपत्रों की प्रतियां भी मांगी गई हैं। डीडीओ बदलने वाले अफसरों की पड़ताल के लिए निकासी और व्ययन करने वाले पदाधिकारियों, प्रधान लिपिक और लेखापाल के नाम, पदनाम, पदस्थापन अवधि और उनसे संबंधित आदेश भी मांगे गए हैं।
5 खातों से जुड़े कर्मचारियों की नियुक्ति भी जांच के दायरे में
जिन पांच खातों का उल्लेख दस्तावेज में है, उनसे जुड़े पेयी आईडी की सूची भी दी गई है। वित्त विभाग ने इनसे संबंधित कर्मचारियों की पदस्थापन अवधि, नियुक्ति तिथि और सेवानिवृत्ति तिथि तक की जानकारी मांगी है।
जांच केवल बैंक खाते तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी मिलान होगा कि जिस व्यक्ति के नाम पर वेतन भुगतान दिखाया गया, वह संबंधित अवधि में वास्तव में पुलिस बल में कार्यरत था या नहीं।
पांच बैंक खातों में गई रकम, बैंक का भी वित्त विभाग ने मांगा विस्तृत ब्योरा
वित्त विभाग ने हजारीबाग एसपी ऑफिस से पांच बैंक खातों से संबंधित बैंक विवरण देने को कहा है। इन खातों के संबंध में वास्तविक खाता धारक का विवरण भी मांगा गया है।
इससे जांच में यह देखा जाएगा कि वेतन या अन्य मद की राशि किस खाते में गई और खाता किसके नाम पर था। हजारीबाग एसपी के नाम से खोले गए इन खातों के लिए संबंधित बैंक में खाता खोलने का आदेश किसके स्तर से दिया गया था और इसके लिए वित्त विभाग की अनुमति ली गई थी या नहीं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
653 कर्मचारियों के बिल में ई-पेमेंट स्टेटस पर 655 नाम
पहले की जांच में सामने आए सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक 653 कर्मचारियों और 655 नामों मंे अंतर है। हजारीबाग एसपी ऑफिस की ओर से 9 अप्रैल 2026 को उपलब्ध कराई गई जांच रिपोर्ट में संबंधित वेतन विपत्र की हार्ड कॉपी और ट्रेजरी कुबेर पोर्टल के ऑनलाइन रिकॉर्ड में अंतर मिला था।
विपत्र के फॉर्म 17 में की जांच में 653 कर्मचारियों का बिल और कुल 3,63,24,446 रुपए की राशि दर्ज थी। वहीं ई पेमेंट की जांच करने पर 655 व्यक्ति के नाम दिखाई दे रहे थे। अब वित्त विभाग ने संबंधित वेतन विपत्र की कार्यालय प्रति और ई पेमेंट स्टेटस की प्रति भी मांगी है, ताकि अंतर का कारण स्पष्ट हो सके।

