रांची20 घंटे पहले
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स्किल, रिसर्च और रोजगार पर फोकस, उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव
झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी और वोकेशनल कोर्सों की संरचना में बड़ा बदलाव किया गया है। नए सत्र से पूरे पाठ्यक्रम को 19 ब्रॉड डिसिप्लीन में पुनर्गठित किया गया है।
यह बदलाव पारंपरिक विभागीय व्यवस्था से आगे बढ़कर एक लचीले, बहुविषयक, रोजगारोन्मुखी और स्किल आधारित शिक्षा मॉडल की ओर बड़ा संरचनात्मक परिवर्तन माना जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP)-2020 के विजन के अनुरूप उच्च शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उसे कौशल विकास, शोध, नवाचार और रोजगार क्षमता से सीधे जोड़ने का प्रयास किया गया है।
शोध और रोजगार की संभावनाएं तेजी से बढ़ेंगी
नई व्यवस्था में एनवायरमेंटल साइंस एंड सस्टेनेबिलिटी को एक स्वतंत्र ब्रॉड डिसिप्लीन के रूप में शामिल किया गया है। इसे जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और ग्रीन इकोनॉमी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पर्यावरण आधारित रोजगार और शोध की संभावनाएं तेजी से बढ़ेंगी। ऐसे में यह विषय छात्रों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा।
नए पाठ्यक्रम के 19 ब्रॉड डिसिप्लीन:
फिजिकल साइंसेज (Physical Sciences)
लाइफ साइंसेज (Life Sciences)
अर्थ साइंसेज (Earth Sciences)
कंप्यूटर साइंसेज (Computer Sciences)
एनवायरमेंटल साइंस एंड सस्टेनेबिलिटी (Environmental Science & Sustainability)
इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (Engineering & Technology)
मैनेजमेंट स्टडीज (Management Studies)
कॉमर्स एंड फाइनेंस (Commerce & Finance)
लॉ / लीगल स्टडीज (Law / Legal Studies)
ह्यूमैनिटीज (Humanities)
सोशल साइंसेज (Social Sciences)
एजुकेशन (Education)
ट्राइबल एंड रीजनल स्टडीज (Tribal & Regional Studies)
लैंग्वेज एंड लिटरेचर – भारतीय भाषाएं (Language & Literature)
फॉरेन लैंग्वेजेज (Foreign Languages)
जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (Journalism & Mass Communication)
क्रिएटिव एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स (Creative & Performing Arts)
वोकेशनल एंड स्किल डेवलपमेंट स्टडीज (Vocational & Skill Development Studies)
कंप्यूटर साइंस-तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर
कंप्यूटर साइंसेज और इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी को नई रूपरेखा में प्रमुख स्थान दिया गया है। इसके तहत AI, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों की ओर शिक्षा को उन्मुख करने की तैयारी की गई है। बीसीए-एमसीए जैसे कोर्सों को भी इस संरचना में व्यवस्थित तरीके से शामिल किया गया है, ताकि छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सके।
नई व्यवस्था में शामिल हैं कई अहम शैक्षणिक सुधार
नई अकादमिक रूपरेखा में कई महत्वपूर्ण शैक्षणिक सुधार शामिल किए गए हैं। इनमें मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट सिस्टम प्रमुख है, जिसके तहत छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ने की स्थिति में भी प्रमाणपत्र या डिप्लोमा प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा क्रेडिट आधारित करिकुलम प्रणाली लागू की गई है, जिसमें प्रत्येक विषय को क्रेडिट सिस्टम से जोड़ा गया है। अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (ABC) का भी एकीकरण किया गया है, जिससे छात्र अपने क्रेडिट सुरक्षित रख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उनका ट्रांसफर भी कर सकेंगे।


