सुपौल में बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीएसएपी)-12, भीमनगर परिसर शनिवार को ऐतिहासिक पल का साक्षी बना, जब 1074 प्रशिक्षु महिला सिपाहियों ने 38 सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण के बाद दीक्षांत परेड में शानदार मार्चपास्ट कर बिहार पुलिस परिवार में औपचारिक रूप से प
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अनुशासन, आत्मविश्वास और जोश से भरपूर महिला सिपाहियों ने आकर्षक कदमताल से उपस्थित अधिकारियों, अभिभावकों और अतिथियों का मन मोह लिया। कोसी रेंज के डीआईजी डॉ. कुमार आशीष ने मुख्य अतिथि के रूप में परेड की सलामी ली और सभी प्रशिक्षुओं को संविधान के प्रति निष्ठा, जनसेवा और ईमानदार पुलिसिंग का संकल्प दिलाया।
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समारोह के लिए परेड ग्राउंड को विशेष रूप से सजाया गया था। चारों ओर पंडाल बनाकर अभिभावकों के बैठने की व्यवस्था की गई थी।
कड़ी धूप के बावजूद महिला सिपाहियों का उत्साह और अनुशासन पूरे समारोह में देखने लायक रहा। परेड के बाद अभिभावकों ने अपनी बेटियों को वर्दी में देखकर गर्व महसूस किया और पूरा परिसर तालियों की गूंज से देर तक गूंजता रहा।
बीएसएपी-12 में 44 प्रशिक्षकों ने 1074 महिला सिपाहियों को 38 सप्ताह तक कठोर प्रशिक्षण दिया। इस दौरान शारीरिक दक्षता, हथियार संचालन, कानून-व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, मानवाधिकार, आंतरिक सुरक्षा तथा अनुशासन जैसे विषयों पर व्यावहारिक और सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया गया। नियमित मूल्यांकन और कठिन अभ्यास के बाद सभी प्रशिक्षुओं ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया।

समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली मुख्य परेड कमांडर मेघा कुमारी सहित सात महिला सिपाहियों को डीआईजी डॉ. कुमार आशीष ने पदक देकर सम्मानित किया। वहीं बेहतर प्रशिक्षण और उत्कृष्ट व्यवस्था के लिए बीएसएपी-12 के कमांडेंट शशि रंजन को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर एसएसबी के कमांडेंट गौरव सिंह, वीरपुर एसडीपीओ समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक पदाधिकारी और बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे। अपने संबोधन में डीआईजी डॉ. कुमार आशीष ने कहा कि पुलिस की वर्दी केवल अधिकार का नहीं, बल्कि सेवा, त्याग, अनुशासन और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत उसका अधिकार नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है।

उन्होंने महिला सिपाहियों से हर नागरिक के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार करने, संविधान के प्रति निष्ठावान रहने तथा ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में साइबर अपराध, डिजिटल तकनीक और नई चुनौतियों को देखते हुए पुलिसकर्मियों को लगातार सीखते रहना होगा। महिला पुलिसकर्मी अब केवल महिला सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, सामुदायिक पुलिसिंग और आपदा राहत जैसे सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


