Sunday, May 3, 2026

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There were once 22,000 workers, now only 2200 workers are left…

रांची23 घंटे पहलेलेखक: शशि कुमार

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रांची की पहचान ऐतिहासिक औद्योगिक इकाई एचईसी आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। स्थापना वर्ष 1958 में इस संस्थान की परिकल्पना भारत में भारी उद्योगों और फैक्ट्रियों को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी। एचईसी ने देश को भारी मशीनों और उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई और स्टील, ऊर्जा तथा रक्षा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मशीनें तैयार कीं।

एक समय यहां लगभग 22,000 कर्मचारी कार्यरत थे, लेकिन आज यह संख्या घटकर केवल लगभग 900 स्थायी कर्मचारी और 1300 अनुबंध कर्मियों तक सीमित रह गई है। वर्ष 2017 के बाद से कंपनी की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। इसके बाद 2018 से स्थायी सीएमडी की नियुक्ति नहीं हो सकी और वर्तमान में भेल के सीएमडी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि कर्मियों को पिछले 29 महीनों से वेतन नहीं मिला है। यह केवल एक कंपनी का संकट नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के सम्मान का प्रश्न है।

2200 करोड़ से ज्यादा की देनदारियां एचईसी पर कुल कर्ज और बकाया 2200 करोड़ से अधिक हो चुका है। इसमें बिजली विभाग का करीब 280 करोड़ रुपए बकाया है। इसके अलावा बैंक का कर्ज, कर्मचारियों का वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी जैसी देनदारियां अलग से हैं। एचईसी की करीब 250 करोड़ की बैंक गारंटी खत्म हो गई है। इस वजह से प्रत्येक माह बैंक को तीन करोड़ रुपए ब्याज चुकाना पड़ रहा है।

अभी भी 450 करोड़ रुपए के वर्कऑर्डर: वर्तमान में एचईसी के पास करीब 450 करोड़ रुपए के वर्कऑर्डर हैं। ये वर्कऑर्डर एनसीएल, भिलाई स्टील, सीसीएल, भेल, बीसीएल आदि कंपनियों के हैं। इनमें क्रेन, खनन मशीन, क्रशर, शॉवेल, फाउंड्री और फोर्जिंग उत्पाद, क्रेन और मटेरियल हैंडलिंग, भारी मशीन टूल्स आदि के वर्कऑर्डर हैं।

क्या कहते हैं कामगार… चाय की दुकान लगाने को विवश : राजेश कुमार एचईसी के स्थायी कर्मचारी राजेश कुमार का कहना है कि आर्थिक दबाव बढ़ने के कारण अब चाय की दुकान लगाकर घर का खर्च चला रहे हैं। उनका पिछले दो साल से अधिक का वेतन बकाया है।

ऑटो चला घर का खर्च पूरा कर रहा हूं : संजीव स्थायी कर्मचारी संजीव तिर्की ने कहा कि कर्ज में डूबे हैं। बैंक से लोन भी नहीं मिल पा रहा। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। इसी वजह से खाली समय में ऑटो चलाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

क्या कहते हैं यूनियन नेता… मजदूरों की सुविधाएं कम होती जा रही : लीलाधर एचईसी प्रोजेक्ट यूनियन के महामंत्री लीलाधर सिंह ने कहा कि आज एचईसी में मजदूरों की सुविधाएं लगातार कम होती जा रही हैं। वेतन व्यवस्था पूरी तरह अनियमित हो चुकी है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।

एचईसी के लिए ठोस कदम उठाए सरकार: सन्नी एचईसी श्रमिक संघ के अध्यक्ष सन्नी सिंह ने कहा कि सबसे गंभीर स्थिति यह है कि कर्मचारियों को पिछले 29 महीनों से वेतन नहीं मिला है। सेवानिवृत्त कर्मियों की ग्रेच्युटी भी लंबे समय से बकाया है।

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