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Three schools have been operating in four rooms for two years… with classes even held in the veranda.

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पटना43 मिनट पहले

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जिस स्कूल के पास करोड़ों की 10 कट्ठा जमीन है, उसके बच्चे बरामदे में पढ़ते हैं। यह हाल करबिगहिया स्थित बालक मध्य विद्यालय का है। इस कैंपस में दो और स्कूल चलते हैं-कन्या मध्य विद्यालय और न्यू सिन्हा मॉडर्न विद्यालय। तीनों स्कूलों को मिलाकर 500 से अधिक बच्चे और 24 शिक्षक हैं।

कमरे महज चार हैं। वर्ष 1957 में स्थापित इस स्कूल के आठ कमरों को दो साल पहले (जनवरी से मार्च 2024) तोड़वा दिया गया, ताकि नया भवन बनाया जा सके। तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने खुद आकर इस भवन को तोड़वाया था। लेकिन, दो साल बाद भी निर्माण कार्य ठप है। तीन स्कूलों के 500 बच्चे चार कमरों में नहीं बैठ सकते, लिहाजा बरामदे में पढ़ना पड़ता है।

शौचालय और शुद्ध पानी की भी व्यवस्था ठीक नहीं

जिस स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए कमरे ही नहीं हों, वहां अन्य सुविधाओं की बात बेमानी है। कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, पीने के शुद्ध पानी और शौचालय की सुविधा नहीं है। पेयजल के लिए एक साधारण बोरिंग है, लेकिन वाटर प्यूरीफायर नहीं लगा है।

डीईओ बोले-हमारे अधिकार क्षेत्र से बाहर

डीईओ साकेत रंजन ने कहा कि भवन निर्माण के मामले में हमारे पास अब कोई सीधा अधिकार नहीं रह गया है। हमारा काम प्रस्ताव या रिपोर्ट भेज देना होता है। यह पूरा कार्य बिहार राज्य शैक्षिक अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड द्वारा किया जाता है।

लगातार पत्राचार, पर कोई पहल नहीं

स्कूल द्वारा लगातार पत्राचार के बाद भी निर्माण कार्य नहीं हो रहा है। 18 जून 2024 और 10 अक्टूबर 2025 को डीईआे को पत्र लिखा गया। शिक्षा विभाग के डिजिटल पोर्टल ई-शिक्षाकोश पर भी दो साल पहले भवन निर्माण के लिए आवेदन किया गया। लेकिन, कोई पहल नहीं की जा रही है।

नया भवन बनाने के लिए आठ कमरों को दो साल पहले तुड़वा दिया गया

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