Tuesday, July 14, 2026

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अब खिलाड़ियों के आंखों की एक्टिविटी होगी रिकॉर्ड:आई-ट्रैकिंग सिस्टम का हुआ सफल प्रदर्शन, IIT चेन्नई और BSSA के बीच होगा समझौता


बिहार में खेल के विकास के लिए IIT चेन्नई और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के बीच समझौता होगा। आज पाटलिपुत्र खेल परिसर में IIT चेन्नई के डॉ बापजी श्रीनिवासन ने तीरंदाजी और शूटिंग के लिए विकसित आई-ट्रैकिंग सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया। इसका उद्देश्य हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और डेटा आधारित विश्लेषण के माध्यम से खिलाड़ियों को साइंटिफिक ट्रेनिंग उपलब्ध कराना है। आई-ट्रैकिंग सिस्टम का सफल प्रदर्शन हुआ इस बात की जानकारी देते हुए बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवीन्द्रण शंकरण ने बताया कि मई महीने में IIT चेन्नई के दौरे के दौरान डॉ. महेश और डॉ. बापजी श्रीनिवासन से बिहार में खेल और खिलाड़ियों के विकास पर विस्तृत चर्चा के साथ आईआईटी मद्रास के रिसर्च पार्क, विभिन्न विभाग, विभिन्न रिसर्च लैब एवं इंक्यूबेशन सेंटर का दौरा किया गया, जहां खेल और स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी से जुड़े विभिन्न स्टार्टअप्स के कार्यों को करीब से समझने का अवसर मिला। इसी सिलसिले में आज उन्होंने पटना में तीरंदाजी और शूटिंग के लिए विकसित आई-ट्रैकिंग सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया। खिलाड़ी की आंखों की एक्टिविटी को रिकॉर्ड करेंगे इस आई ट्रैकिंग सिस्टम के बारे में जानकारी देते हुए डॉक्टर श्रीनिवासन ने कहा कि हमारी प्रमुख तकनीकों में से एक आई-ट्रैकिंग सिस्टम है, जिसे विशेष रूप से तीरंदाजों और निशानेबाज़ों के लिए विकसित किया गया है। इस सिस्टम में दो कैमरे खिलाड़ी की आंखों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करते हैं, जबकि एक बाहरी कैमरा लक्ष्य पर नज़र रखता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि खिलाड़ी का ध्यान किस प्रकार केंद्रित है। अनुभवी खिलाड़ी की नज़र लक्ष्य पर अधिक स्थिर रहती है, जबकि शुरुआती खिलाड़ियों की दृष्टि अपेक्षाकृत अधिक भटकती है। यह तकनीक खिलाड़ियों के फोकस का वैज्ञानिक विश्लेषण कर उनके प्रदर्शन में सुधार करने में मदद करती है। स्मार्ट इनसोल सिस्टम खिलाड़ी के जूते के अंदर लगाया जाता हमने एक स्मार्ट इनसोल सिस्टम भी विकसित किया है, जिसे खिलाड़ी के जूते के अंदर लगाया जाता है। यह पैरों पर पड़ने वाले दबाव और शरीर के संतुलन को मापता है। तीरंदाजी और शूटिंग जैसे खेलों में यह बताता है कि खिलाड़ी का भार दोनों पैरों पर समान रूप से है या नहीं, वह आगे या पीछे कितना झुक रहा है और उसकी मुद्रा कितनी संतुलित है। यही तकनीक एथलेटिक्स और भारोत्तोलन में भी उपयोगी है, जहां यह बल वितरण और मूवमेंट का सटीक विश्लेषण करती है।

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