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झारखंड से देश के अलग-अलग राज्यों में गांजा और अफीम की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय सिंडिकेट ने ट्रेनों को सबसे सुरक्षित जरिया बना लिया है। तस्करों ने बाकायदा रूट मैप तैयार कर रखा है, जिसके जरिए ट्रेनों के स्लीपर और जनरल कोच से रोजाना गांजा और अफीम की बड़ी खेप बिहार, पंजाब, दिल्ली और हरियाणा भेजी जा रही है। हाल में ट्रेन से नशे की कई खेप पकड़े जाने के बाद भास्कर ने पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। तस्कर इस काम के लिए ऐसे किशोरों को फांसते हैं, जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत हो। इसमें लड़कियां भी शामिल हैं। तस्कर इन किशोरों को प्रति किलो गांजा-अफीम गंतव्य तक पहुंचाने की एवज में 1000 रुपए तक दिहाड़ी देता है। यह नेटवर्क इतने गुप्त तरीके से चलता है कि काम करने वाले युवाओं को अपने ही सरगना का नाम-पता मालूम नहीं रहता है। ऐसे में पुलिस और जीआरपी के हाथ सिर्फ प्यादे लगते हैं और मुख्य सरगना आजाद घूमता रहता है। पुलिस के मुताबिक इस धंधे में कोच अटेंडेंट की भी संलिप्तता है। सीआरपीएफ के दो जवान भी गांजा तस्करी का आरोपी 1. लातेहार के शशिभूषण सिंह उर्फ बिट्टू के खिलाफ रांची रेल थाने में 25 फरवरी 2023 को केस दर्ज किया गया था। वह सीआरपीएफ के 214 बटालियन का जवान था और छत्तीसगढ़ के बीजापुर में तैनात था। उस पर गांजा तस्करी में सहयोग करने का आरोप था। 2. छतीसगढ़ के बस्तर बटालियन में तैनात सीआरपीएफ जवान अमित सिंह के खिलाफ रांची रेल थाना में 25 फरवरी 2003 को केस दर्ज किया गया था। हरियाणा के सोनीपत निवासी अमित पर तस्करों की मदद का आरोप था। इस मामले में वह जमानत पर है। किंगपिन भागा लंदन, रेड कॉर्नर नोटिस की तैयारी
डालटनगंज में गांजे के साथ तस्कर की गिरफ्तारी हुई थी। डालटनगंज रेल थाना में कांड संख्या 43/24 दर्ज किया गया था जीआरपी की जांच में तस्करी के तार चंडीगढ़ से जुड़े। जीआरपी जब पंजाब के दलजिंदर सिंह तक पहुंची तो वह हैदराबाद भाग गया। पुलिस हैदराबाद गई तो वह लंदन भाग गया। अब उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। ये है तस्करी का रूट मैप ओडिशा से आता है गांजा, यहां से अलग-अलग ट्रेनों में भेजा जाता है गांजा मुख्य रूप से ओडिशा के राउरकेला और सुंदरगढ़ इलाकों से ‘अल्लपुज्जा एक्सप्रेस’, ‘समलेश्वरी एक्सप्रेस’ और ‘मौर्या एक्सप्रे स’ जैसी ट्रेनों से रांची और धनबाद लाया जाता है। यहां से सिंडिकेट का दूसरा ग्रुप हटिया व मुरी स्टेशनों पर अलग-अलग ट्रेनों में गांजे की खेप चढ़ाकर बिहार, यूपी, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब तक भेजता है। अफीम डालटनगंज-कोडरमा और बरकाकाना रूट से भेजी जाती है अफीम की खरीद मुख्य रूप से चतरा, पलामू, हजारीबाग और कोडरमा जिले से की जाती है। तस्कर खुद किसानों को इसकी खेती करने के लिए फंड उपलब्ध कराता है। जरूरत पड़ने पर अफीम का बीज भी मुहैया कराता है। यहां से अफीम डालटनगंज, कोडरमा और बरकाकाना रूट पर चलने वाली ट्रेनों के जरिए गुजरात, पंजाब और नई दिल्ली तक भेजी जाती है। डिलीवरी ब्वॉय को सीट पर मिलती है खेप, मोबाइल पर टिकट
पुलिस से बचने के लिए तस्कर स्टूडेंट्स को डिलीवरी ब्वॉय बनाने पर ज्यादा जोर देते हैं। इसमें कम उम्र की युवतियां भी शामिल होती हैं। डिलीवरी ब्वॉय को मोबाइल पर ट्रेन टिकट भेज दिया जाता है। जो सीट होती है, वहां पहले से ही नशे की खेप रखी रहती है। उसे मोबाइल पर इसकी जानकारी दे दी जाती है। डिलीवरी ब्वॉय का काम सिर्फ वह बैग उतारकर गंतव्य तक पहुंचाना होता है। चतरा के बंठा गांव में अफीम तस्कर कुटुंब गंझू तक पहुंचा भास्कर भास्कर स्टिंग – एडवांस राशि देकर कराते हैं अफीम की खेती, फिर होती है इसकी तस्करी रिपोर्टर: अफीम की खेती किस जमीन पर करते हैं?
तस्कर: वन विभाग की सरकारी जमीन पर अफीम की फसल उगाते हैं, ताकि पकड़े जाने पर रैयत तक पुलिस न पहुंच पाए। रिपोर्टर: अफीम तैयार करने पर कितना खर्च आता है?
तस्कर: छह माह की कड़ी मेहनत के बाद फसल तैयार होती है। एक एकड़ में अफीम की फसल उगाने पर 20 हजार रुपए तक का खर्च आता है। इसे बेचने पर एक लाख रुपए की कमाई होती है। रिपोर्टर: खेती के लिए क्या तस्कर एडवांस देते हैं?
तस्कर: पंजाब-दिल्ली के खरीदार के लोग यहां आते-जाते रहते हैं। जिसके पास फसल उगाने के लिए पैसे नहीं होते, उन्हें एडवांस पैसे दिए जाते हैं। जब तैयार माल लेता है तो वह पैसे काट लेता है। रिपोर्टर: अफीम की डिलीवरी कैसे होती है?
तस्कर: खरीदार के लोग बाइक और कार से नजदीकी रेलवे स्टेशन पहुंचाते हैं। फिर ट्रेन से पंजाब, हरियाणा और गुजरात भेजा जाता है। सीधी बात – अनिल पालटा, रेल डीजी, झारखंड 18 माह में 126 गिरफ्तार, 1610 किलो गांजा, 4.487 किलो अफीम जब्त ट्रेनों से तस्करी रोकने के लिए क्या कर रहे हैं?
-जीआरपी-आरपीएफ तस्करी रोकने पर लगातार काम कर रही है। कई तस्कर पकड़े जा रहे हैं। रूट-ट्रेन चिह्नित है, फिर भी तस्करी कैसे हो रही है?
-ऐसा नहीं है कि जीआरपी-आरपीएफ सतर्क नहीं है। सजगता का ही परिणाम है कि इन रूट्स के ट्रेनों में 18 माह में 126 गिरफ्तार किए गए। इनसे 1610 किलो गांजा, 4.487 किलो अफीम और 3.56 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद किए गए। 90 एफआईआर भी दर्ज की गई। तस्करी पर पूर्ण रोक लगाने की क्या योजना है?
-जीआरपी डिलीवरी देने-लेने वाले दोनों सरगना को पकड़ रहे हैं। जब सरगना पकड़े जाएंगे तो तस्करी रुकेगी।
अब ट्रेनों से नशे की तस्करी:1000 रुपए प्रति किलो दिहाड़ी पर किशोर से करा रहे सप्लाई
