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जामताड़ा जिले के सदर प्रखंड की गोपालपुर पंचायत के रामबारी गांव में करीब 70 साल से सड़क और पुल का इंतजार है। लगभग 700 की आबादी वाले इस गांव से गोपालपुर पहुंचने के लिए ग्रामीणों को करीब चार किलोमीटर कच्ची पगडंडियों से गुजरना पड़ता है। गांव तक पहुंचने के लिए अब तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है। सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के दिनों में होती है। जोरिया नदी में पानी भर जाने के बाद गांव का संपर्क लगभग मुश्किल हो जाता है। बच्चों को इसी नदी को पार कर गोपालपुर हाई स्कूल जाना पड़ता है। कक्षा नौवीं और दसवीं के छात्रों ने बताया कि बारिश के दौरान नदी में पानी बढ़ने से स्कूल जाने में परेशानी होती है। पढ़ाई भी प्रभावित होती है। परिजनों को हर दिन बच्चों की सुरक्षा की चिंता रहती है। स्टूडेंट्स को होने वाली परेशानी की तस्वीरें देखें… बोरा बांध के सहारे हो रहा आना-जाना ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पुल और सड़क की मांग लंबे समय से की जा रही है। ग्रामीण मनोज सोरेन के अनुसार पूर्व डीसी जटाशंकर चौधरी के कार्यकाल में पुल निर्माण के लिए डीपीआर मांगा गया था, लेकिन कुछ कारणों से काम आगे नहीं बढ़ सका। फिलहाल जोरिया नदी पर बोरा बांध बनाकर किसी तरह आवागमन चलाया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीण विष्णु महतो ने कहा कि 70 वर्षों से गांव का विकास नहीं हुआ है। उनके अनुसार उनके बाप-दादा भी सड़क और पुल की मांग करते-करते गुजर गये, लेकिन आज तक न सड़क बनी और न पुल। उन्होंने कहा कि गांव में किसी के बीमार पड़ने पर उसे खटिया पर लादकर सड़क तक लाना पड़ता है। इसके बाद ही मरीज को वाहन मिल पाता है। उन्होंने प्रशासन और सरकार से तत्काल सड़क और पुल निर्माण की मांग की है। आय देने वाली पंचायत गोपालपुर मामले को लेकर गोपालपुर पंचायत की मुखिया सरोज हेंब्रम ने कहा कि जामताड़ा शहर को सबसे ज्यादा आर्थिक आय देने वाली पंचायत गोपालपुर है, लेकिन विकास योजनाओं में पंचायत अपेक्षित रही है। उन्होंने कहा कि गोपालपुर पंचायत का पानी जामताड़ा शहर के घर-घर तक पहुंचता है। इससे अर्जित आय जिला फंड में जमा होती है। इसके बावजूद पंचायत के विकास कार्यों पर प्रशासन का अपेक्षित ध्यान नहीं है। इससे यहां के लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। मुखिया ने भी गांव की सड़क और पुल की समस्या के समाधान की मांग की है। डीएमएफटी से निर्माण की संभावना उपायुक्त आलोक कुमार ने बताया कि मामले में आरसीडी विभाग को आवश्यक निर्देश दिया गया है। प्रशासन अपने स्तर से सीएसआर या डीएमएफटी फंड से योजना पूरी करने की संभावना पर भी विचार करेगा। यदि योजना की लागत कम रहती है, तो डीएमएफटी फंड से निर्माण कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एस्टीमेट आने के बाद पूरी प्रक्रिया स्पष्ट हो जाएगी। ऐसे में रामबारी के ग्रामीणों को अब प्रशासनिक पहल और योजना के एस्टीमेट का इंतजार है। सात दशक से सड़क और पुल की बाट जोह रहे ग्रामीणों के लिए नदी पर बना बोरा बांध फिलहाल मजबूरी का रास्ता बना हुआ है।
नाला-खेत पार 4 किमी दूर बच्चे जाते हैं स्कूल:जामताड़ा के रामबारी गांव को 70 साल से सड़क-पुल का इंतजार, DC बोले -CSR के भरोसे निर्माण
