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नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा को बोझ मुक्त और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से पीएमश्री राजकीय कृत मध्य विद्यालय विद्यालय नवाड़ीपाड़ा, लोहरदगा में मंगलवार को कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों के लिए बैगलेस डे का आयोजन किया गया। बच्चों के बीच इस तरह के आयोजन को लेकर अभिभावकों ने सभी विद्यालयों में इसे प्रत्येक माह के 1 दिन लागू करने की भी बात कही है। इससे बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य चीजों कार्यों की जानकारी हो सकेगी। इधर कार्यक्रम के तहत विद्यालय के बच्चों को जयनाथपुर स्थित मां सरस्वती औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) का शैक्षणिक व औद्योगिक भ्रमण कराया गया। बच्चे अनुशासित रूप से कतारबद्ध होकर संस्थान परिसर पहुंचे। भ्रमण के दौरान बच्चों ने संस्थान में संचालित विभिन्न व्यवसायों जैसे इलेक्ट्रिकल, फिटर, कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, सौर ऊर्जा तकनीक आदि लैब का भौतिक अवलोकन किया। छात्रों ने इलेक्ट्रिक पैनल, फिटर लैब की मशीनें, कंप्यूटर लैब और सोलर लैब को करीब से देखा और यह समझा कि मशीन किस प्रकार कार्य करती है। बच्चों ने प्रशिक्षकों से कई जिज्ञासु सवाल भी पूछे। इस दौरान बच्चों में सीखने की अद्भुत ललक देखने को मिली। कई बच्चों ने कहा कि उन्होंने किताबों में जिन मशीनों के बारे में पढ़ा था, आज उन्हें अपनी आंखों से देखकर बहुत कुछ नया सीखने को मिला। संस्थान के प्राचार्य सह निदेशक विजय कुमार ने बच्चों को संबोधित करते हुए मशीनों के सुरक्षित उपयोग, कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों के पालन और तकनीकी शिक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईटीआई से तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद स्वरोजगार और सरकारी व निजी क्षेत्रों में रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध होते हैं। तकनीकी ज्ञान आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। प्रधानाध्यापक अरुण राम ने बताया कि बैगलेस डे का मुख्य उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर व्यावहारिक ज्ञान, कौशल विकास और करियर मार्गदर्शन से जोड़ना है। इस तरह के भ्रमण से बच्चों में आत्मविश्वास और भविष्य के प्रति जागरूकता बढ़ती है। मौके पर विद्यालय के विज्ञान शिक्षक राहुल कुमार, उजबेला तिर्की, अनूप एक्का एवं संस्थान के प्रशिक्षक तनवीर हसन अंसारी, शादाब आजमी, चंदन कुमार, मोहम्मद अमन खलीफा, पुनीता लकड़ा, अर्जुन कुमार महतो, उमेश महतो, आकाश उरांव, महवीश नाज, अशरफुल अंसारी, मोहन महतो आदि उपस्थित थे।
अभिभावकों ने कार्यक्रम को प्रत्येक स्कूलों में माह के एक दिन लागू करने की मांग की
