धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर मंगलवार को रांची विश्वविद्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कुलपति ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक युगदृष्टा, समाज सुधारक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक थे। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और स्वाभिमान की अमर गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।इस मौके पर कुलपति ने कहा कि रांची विश्वविद्यालय परिसर में भगवान बिरसा मुंडा की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतिमा के समक्ष एक आकर्षक फव्वारे का भी निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह स्थल विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित होगा, जहां लोग धरती आबा के जीवन, संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा प्राप्त कर सकेंगे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डॉ. गुरुचरण साहू, प्रो. सुदेश साहू, अजय कुमार, डॉ. दिलीप प्रसाद, डॉ. बिप्लव पांडेय, डॉ. अजय लकड़ा, नवीन चंचल, अर्जुन कुमार, बिरेंद्र वर्मा, काइफी, करमबीर ओरियन, राणा प्रताप, आशीष, अजीत, जनार्दन आदि मौजूद थे।
आरयू परिसर में लगेगी भगवान बिरसा की भव्य प्रतिमा: वीसी
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर मंगलवार को रांची विश्वविद्यालय में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कुलपति ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक युगदृष्टा, समाज सुधारक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक थे। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और स्वाभिमान की अमर गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।इस मौके पर कुलपति ने कहा कि रांची विश्वविद्यालय परिसर में भगवान बिरसा मुंडा की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतिमा के समक्ष एक आकर्षक फव्वारे का भी निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह स्थल विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित होगा, जहां लोग धरती आबा के जीवन, संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा प्राप्त कर सकेंगे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डॉ. गुरुचरण साहू, प्रो. सुदेश साहू, अजय कुमार, डॉ. दिलीप प्रसाद, डॉ. बिप्लव पांडेय, डॉ. अजय लकड़ा, नवीन चंचल, अर्जुन कुमार, बिरेंद्र वर्मा, काइफी, करमबीर ओरियन, राणा प्रताप, आशीष, अजीत, जनार्दन आदि मौजूद थे।


