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बोकारो इस्पात संयंत्र के द्वार अवरुद्ध होने से उत्पादन और कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। बीएसएल प्रबंधन ने विस्थापितों से भूख हड़ताल समाप्त करने और सभी पक्षों से बातचीत के जरिए गतिरोध दूर करने की अपील की है। प्रबंधन के अनुसार, लंबे समय तक बाधा बनी रहने से संयंत्र, कर्मचारियों और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है। प्रबंधन ने बताया कि 10 अक्टूबर से विस्थापित प्रशासनिक भवन के सामने भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अब मुख्य द्वार को छोड़कर अन्य द्वार भी अवरुद्ध कर दिए गए हैं, जिससे आपूर्ति बाधित हो रही है। सिटी रिपोर्टर | बोकारो नियोजन की मांग को लेकर विस्थापित अप्रेंटिस संघ और विस्थापित परिवारों का आंदोलन अब बीएसएल के संचालन पर असर डालने लगा है। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के सातवें दिन आंदोलनकारियों ने बीएसएल के मुख्य गेट को छोड़कर अन्य सभी 11 गेटों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया। गेट जाम होने से ड्यूटी पर पहुंचे कई कर्मचारियों को वापस लौटना पड़ा, जबकि कुछ कर्मचारी मेन गेट से प्लांट में प्रवेश करते दिखे। आंदोलन के कारण कर्मचारियों की आवाजाही के साथ उत्पादन, कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार इस्पात की डिस्पैच प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। एक आंकड़ों के अनुसार बीएसएल प्लांट के गेट 09 और 10 से लगभग 270 से 300 वाहनों का आवागमन होता है। वहीं बीएसएल के पास लगभग 10 दिन का स्टॉक है, इसलिए तुरंत कोई संकट नहीं है। लेकिन यह गतिरोध लंबा चला तो बीएसएल प्लांट पर संकट आ जाएगा। वहीं गेट से वाहनों के नहीं निकलने के कारण गेट के आसपास नया मोड़ आदि में भारी वाहनों की कतार लगी हुई है। वहीं, बोकारो विधायक श्वेता सिंह सातवें दिन भी आंदोलनकारियों के साथ धरने पर डटी हैं। सांसद ने भी विस्थापितों की नियोजन संबंधी मांग का समर्थन किया है। वहीं शुक्रवार को सांसद प्रतिनिधि एंजेला सिंह की तबियत बिगड़ने पर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अप्रेंटिस 1100 विस्थापित की बहाली है मुख्य मांग आंदोलन के केंद्र में करीब 1100 विस्थापित अप्रेंटिस हैं, जो नियोजन की मांग कर रहे हैं। विस्थापित अप्रेंटिस संघ की प्रमुख मांग है कि पूर्व की तरह चतुर्थ वर्ग के पदों पर नियोजन दिया जाए। विस्थापित परिवारों के युवाओं को रोजगार का अवसर मिलना चाहिए और पूर्व में नियोजन को लेकर बनी सहमति पर अमल होना चाहिए। आंदोलनकारियों के अनुसार, प्रेम महतो की मौत के बाद हुई त्रिपक्षीय वार्ता में नियोजन के मुद्दे पर सहमति बनी थी, लेकिन 16 महीने बीतने के बाद भी इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे विस्थापितों में नाराजगी है।
उग्र आंदोलन:बीएसएल के 11 गेट अनिश्चितकाल के लिए बंद, 7वें दिन भी भूख हड़ताल रहा जारी

