जिले के ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत वर्ष 2019-20 में लगभग 56 हजार गरीब परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन मिला था। योजना का उद्देश्य महिलाओं को लकड़ी और अन्य पारंपरिक ईंधन से होने वाले धुएं से राहत दिलाना और स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में तीन हजार से अधिक महिलाएं गैस सिलेंडर का नियमित उपयोग करने के बजाय अब फिर लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं। ग्रामीण महिलाओं के अनुसार, गैस कनेक्शन मिलने के बाद शुरुआती दिनों में उन्होंने चूल्हे का उपयोग किया था। लेकिन सिलेंडर खत्म होने के बाद दोबारा रिफिल कराने का खर्च बढ़ गया। इसी कारण उन्हें फिर लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेना पड़ा। ग्रामीण इलाकों में लकड़ी आसानी से उपलब्ध होने के कारण कई परिवार इसे खाना पकाने का सस्ता विकल्प मानते हैं। कुछ परिवारों के लिए गैस सिलेंडर की कीमत एकमुश्त खर्च बन जाती है, जबकि लकड़ी जुटाने में सीधे पैसे खर्च नहीं होते। इसके चलते महिलाएं और बच्चे फिर धुएं के संपर्क में आ रहे हैं। सरकार के अनुसार, स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल से घरेलू वायु प्रदूषण कम होता है। इससे महिलाओं का लकड़ी जुटाने में लगने वाला समय और मेहनत भी बचती है।
