महीनों से गंभीर आर्थिक तंगी और वेतन संकट से जूझ रहे एचईसी को उबारने के लिए प्रबंधन स्तर पर अब ‘करो या मरो’ वाली कसरत शुरू हो गई है। एचईसी के लिए राहत भरी खबर यह है कि आगामी तीन महीनों में नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएमडीसी), भिलाई स्टील प्लांट और एनसीएल से लगभग 40 करोड़ रुपए के नए वर्कऑर्डर मिलने की पूरी संभावना है। अधिकारियों के मुताबिक इस दिशा में प्रारंभिक सहमति बन चुकी है। इसके अलावा, संकटग्रस्त मदर इंडस्ट्री के दिन बहुरने की उम्मीद इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि जून माह में संसदीय कमेटी की एक टीम एचईसी का दौरा करने वाली है। माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद केंद्र सरकार के स्तर पर कंपनी को पुनर्जीवित करने के पैकेज पर अंतिम मुहर लग सकती है। बैठक में ये रहे मौजूद सीटू की ओर से हरेंद्र प्रसाद, भवन सिंह, प्रमोद वैद्य, महेंद्र प्रसाद, संतोष राय और हटिया मजदूर लोक मंच की तरफ से रामकुमार नायक, विमल महली, राकेश बैठा, बहा कच्छप सहित कई श्रमिक प्रतिनिधि थे। उत्पादन बढ़ाना ही रास्ता निदेशक (कार्मिक) केके घोष ने कहा कि प्रबंधन ने यूनियनों की मांगों को बेहद गंभीरता से लिया है। कई बिंदुओं पर सहमति बन गई है। कंपनी को जिंदा रखने के लिए उत्पादन बढ़ाना ही एकमात्र रास्ता है। महामंथन : उत्पादन बढ़ाने पर बनी बात कारखाने के भीतर काम का माहौल सुधारने के लिए निदेशक (कार्मिक) ने तमाम श्रमिक यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ एक मैराथन बैठक की। सीटू और हटिया मजदूर लोक मंच के नेताओं ने दो टूक कहा कि कामगार पूरी निष्ठा और मेहनत के साथ उत्पादन बढ़ाने के लिए दिन-रात एक करने को तैयार हैं। यूनियन प्रतिनिधियों ने नियमित वेतन भुगतान, बकाया एरियर का जल्द निपटारा करने की मांग उठाई।
1 माह का वेतन दिया, लोन की ईएमआई चुकाई, साख सुधरी महीनों से बकाए वेतन की मार झेल रहे कर्मचारियों के लिए बुधवार का दिन थोड़ी राहत लेकर आया। हटिया लोक मंच के विमल महली ने बताया कि प्रबंधन ने हर स्तर पर प्रयास कर कर्मचारियों को एक माह का वेतन जारी कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी की गारंटी पर लिए गए लोन की मासिक किस्त का भी भुगतान कर दिया गया है, जिससे वित्तीय बाजार में एचईसी की साख को थोड़ा सहारा मिलेगा।


