Thursday, October 8, 2026
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औरंगाबाद में आवास योजना में गड़बड़ी का आरोप:मुखिया संघ ने आंदोलन की चेतावनी, पात्र लोगों के नाम काट सक्षम को लाभ देने का आरोप


औरंगाबाद के जिला परिषद सभागार में गुरुवार को मुखिया संघ की बैठक जिलाध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अनियमितता और लाभुकों के चयन में गड़बड़ी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। संघ के सदस्यों ने आरोप लगाया कि योजना के वास्तविक जरूरतमंद गरीब परिवारों का नाम सूची से हटाकर सक्षम लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। मुखिया संघ ने जिला पदाधिकारी से जिले की सभी पंचायतों में आवास योजना के लाभुकों का दोबारा सर्वे कराने की मांग की। संघ का कहना है कि सर्वे के दौरान ऐसे परिवारों की पहचान की जाए, जिन्हें वास्तव में पक्के और पर्याप्त आवास की जरूरत है। इसके बाद उनका नाम योजना की सूची में शामिल किया जाए। गरीबों का नाम काटने का आरोप, पैसे की उगाही की शिकायत संघ के जिलाध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पंचायत में एक जनप्रतिनिधि ने पंचायत कर्मियों से मिलीभगत कर आवास योजना के नाम पर पैसे की उगाही की। उन्होंने दावा किया कि पक्के मकान वाले लोगों और संबंधित जनप्रतिनिधि के परिवार के सदस्यों के नाम योजना में जोड़ दिए गए, जबकि विधवा महिलाओं, गरीब परिवारों और अधिक सदस्यों वाले जरूरतमंद परिवारों का नाम सूची से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि कई ऐसे परिवार हैं, जिनके पास परिवार के सदस्यों की संख्या के हिसाब से रहने के लिए पर्याप्त कमरे तक नहीं हैं। इसके बावजूद उनका नाम योजना से बाहर कर दिया गया। सिंह ने कहा कि पिछली आवास योजना में भी पैसे की उगाही की शिकायत सामने आई थी और वर्तमान सूची को लेकर भी इसी तरह की शिकायतें मिल रही हैं। मुखिया संघ ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जनप्रतिनिधियों एवं पंचायत कर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। एआई से नाम कटने के दावे पर मुखिया संघ ने उठाए सवाल सदर प्रखंड अध्यक्ष ब्रजमोहन यादव ने कहा कि पंचायत स्तर पर कई जगह यह बताया जा रहा है कि आवास योजना की सूची से नाम एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से हटाए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नाम स्वत: तकनीकी प्रक्रिया से हटाए गए हैं तो सबसे अधिक प्रभावित गरीब और जरूरतमंद परिवार ही क्यों हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक जरूरतमंदों को योजना का लाभ मिलना चाहिए। संघ ने प्रशासन से मांग की कि पंचायतवार सूची की समीक्षा कर ऐसे सभी परिवारों को दोबारा चिह्नित किया जाए, जो आवास योजना के लिए पात्र हैं। मुखिया संघ के सदस्यों ने यह भी कहा कि आवास योजना में मुखिया को लाभुकों के चयन या नाम जोड़ने-काटने का अधिकार नहीं दिया गया है। इसके बावजूद योजना में नाम कटने या नहीं जुड़ने की स्थिति में ग्रामीणों की नाराजगी मुखिया को झेलनी पड़ती है। संघ का आरोप है कि कई पंचायतों में ग्राम समिति की बैठक में गरीब परिवारों को आवास दिलाने के लिए प्रस्ताव पारित किया जाता है, लेकिन बाद में प्रखंड और पंचायत स्तर के कर्मियों द्वारा अपनी पसंद के लोगों के नाम सूची में शामिल कर दिए जाते हैं। जांच नहीं हुई तो न्यायालय जाने और आंदोलन की चेतावनी मुखिया संघ के जिलाध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह ने कहा कि आवास योजना गरीब परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने के उद्देश्य से संचालित महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में यदि पात्र लोगों को लाभ से वंचित कर अपात्र लोगों को योजना का लाभ दिया जाता है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने जिला प्रशासन से पंचायतवार जांच कराने, वास्तविक जरूरतमंदों का दोबारा सर्वे कराने और पात्र परिवारों का नाम सूची में शामिल करने की मांग की। साथ ही कथित अनियमितताओं में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की। संघ ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन की ओर से शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई और वास्तविक जरूरतमंद परिवारों का नाम आवास योजना में दोबारा नहीं जोड़ा गया तो आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर संघ न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगा और जिले में आवास योजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं को सार्वजनिक करेगा।

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