Sunday, August 23, 2026

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औरंगाबाद में नगर निकायों के पुनर्गठन की तैयारी:30 अगस्त तक मांगा गया प्रस्ताव, नए नगर निकायों के गठन पर भी विमर्श


औरंगाबाद जिले में नगर निकायों के पुनर्गठन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कवायद शुरू हो गई है। नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर नगर निकायों के क्षेत्र विस्तार, विलय और नए नगर निकायों के गठन को लेकर प्रस्ताव मांगा है। औरंगाबाद जिले से भी इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर 30 अगस्त तक विभाग को उपलब्ध कराया जाना है। विभागीय निर्देश के अनुसार भारत की जनगणना-2027 का कार्य पूरा होने के बाद राज्य में नगर निकायों के स्वरूप और सीमाओं में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए जिलों से अभी से प्रस्ताव मांगे गए हैं। दो या अधिक नगरपालिका क्षेत्रों को मिलाकर एक नगरपालिका क्षेत्र बनाने, नगर निकाय से सटे ग्रामीण क्षेत्रों को उसमें शामिल करने, पुराने नगर निकायों को उत्क्रमित करने और नए नगर निकायों के गठन के विकल्पों पर विचार किया जाएगा। नगर निगम के दर्जे की मांग को मिला नया आधार औरंगाबाद नगर परिषद को नगर निगम में अपग्रेड करने की लंबे समय से चली आ रही है। मांग को नया आधार मिला है। रविवार को नगर परिषद उत्क्रमण समिति ने पीसी कर सरकार और जिला प्रशासन से औरंगाबाद नगर परिषद को नगर निगम में अपग्रेड करने का प्रस्ताव निर्धारित समय सीमा में भेजने की मांग की। समिति के अनिल कुमार सिंह ने कहा कि औरंगाबाद नगर परिषद नगर निगम बनने की सभी योग्ताएं पूरी करता है। इसके बावजूद अब तक नगर निगम बनाने का प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधान सचिव विनय कुमार के पत्र के अनुसार 30 अगस्त तक प्रस्ताव विभाग को भेजा जाना है। अनिल सिंह के अनुसार नगर निगम के लिए कम से कम 2 लाख की आबादी का मानक है, जबकि औरंगाबाद शहर की आबादी करीब ढाई लाख बताई जा रही है। शहर की आबादी वृद्धि दर भी निर्धारित मानकों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी नगर निगम बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन वह वापस लौट गया था। समिति ने औरंगाबाद को नगर निगम बनाने के साथ गोह, हसपुरा और अंबा को नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव भी 30 अगस्त तक भेजने की मांग की है।
नगर निगम बनने से विकास को मिलेगी गति उत्क्रमण समिति का कहना है कि औरंगाबाद को नगर निगम का दर्जा मिलने से शहर के विकास को नई दिशा मिल सकती है। अनिल कुमार सिंह ने कहा कि नगर निगम बनने के बाद शहर में योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्य कराए जा सकेंगे। केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदान में वृद्धि के साथ राज्य सरकार से भी अधिक बजट मिलने की संभावना रहेगी। उन्होंने कहा कि नगर निगम स्तर पर अधिकारियों और संसाधनों की बेहतर व्यवस्था होने से विकास योजनाओं की प्लानिंग और उनके क्रियान्वयन में तेजी आएगी। सड़क, नाली, पेयजल, साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को भी इससे गति मिलने की उम्मीद है। विभाग की ओर से मांगे गए प्रस्ताव में नगर निकाय की कुल जनसंख्या, कुल कर्मियों और कृषि कर्मियों की संख्या, क्षेत्रफल, जनसंख्या घनत्व, सीमा, चौहद्दी और थाना संख्या समेत अन्य आवश्यक जानकारियां देनी होंगी। विभाग ने बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 3, 7 और 8 के तहत प्रस्ताव मांगा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देश के अनुसार जनगणना-2027 का कार्य पूरा होने तक प्रशासनिक या भौगोलिक सीमाओं में परिवर्तन नहीं किया जाना है। प्रस्ताव नहीं भेजा गया तो हस्ताक्षर अभियान की चेतावनी नगर निगम की मांग को लेकर समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में सरकारी स्तर से प्रस्ताव नहीं भेजा गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने कहा कि 30 अगस्त तक यदि औरंगाबाद को नगर निगम बनाने का प्रस्ताव विभागीय स्तर से नहीं भेजा जाता है तो इसके बाद पूरे शहर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रस्ताव सरकारी स्तर पर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के माध्यम से भेजा जाना है। इसलिए निर्धारित समय सीमा का पालन करना जरूरी है। हस्ताक्षर अभियान के जरिए शहरवासियों की मांग को संबंधित विभाग तक पहुंचाया जाएगा। प्रेस वार्ता में भाजपा नेता उदय सिंह, जिला प्रवक्ता दीपक कुमार सिंह, शत्रुघ्न प्रसाद, मुन्ना, भोला सिंह समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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