![]()
औरंगाबाद के सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष, प्रख्यात शिक्षाविद और इतिहासकार स्वर्गीय प्रो. टी.एन. सिन्हा की प्रथम पुण्यतिथि शुक्रवार को शहर के सम्राट अशोक भवन में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उनके बेटे और बिहार सरकार के कृषि मंत्री के ओएसडी प्रशांत कुमार की ओर से लिखित पुस्तक ‘चरैवेति: एक जीवन यात्रा’ का भव्य लोकार्पण किया गया। समारोह में शिक्षा, साहित्य, राजनीति और समाजसेवा से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों ने भाग लिया और स्व. प्रो. सिन्हा के व्यक्तित्व व कृतित्व को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह, विधान परिषद सदस्य जीवन कुमार, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. दिलीप केसरी, सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज के हेड मास्टर डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा, नगर परिषद चेयरमैन उदय कुमार गुप्ता सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद पुस्तक का विधिवत लोकार्पण किया गया। पुस्तक में समाहित हैं संघर्ष, शिक्षा और समाजसेवा की प्रेरक यात्रा लोकार्पण के बाद लेखक प्रशांत कुमार ने पुस्तक की रचना प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ‘चरैवेति: एक जीवन यात्रा’ केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि उनके पिता के संघर्ष, सिद्धांत, शिक्षा के प्रति समर्पण और सामाजिक चेतना का जीवंत दस्तावेज है। पुस्तक में उनके छात्र जीवन, शिक्षण कार्य, सामाजिक सरोकार, आपातकाल के दौरान पत्रिका संचालन, जेल यात्रा और समाज के प्रति उनके योगदान जैसे कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को शामिल किया गया है। अपने पिता को याद करते हुए प्रशांत कुमार कई बार भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि प्रो. टी.एन. सिन्हा ने हमेशा सत्य, ईमानदारी और शिक्षा को जीवन का आधार माना। उनके विचारों और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस पुस्तक का लेखन किया गया है, ताकि युवा उनके संघर्ष और आदर्शों से प्रेरणा ले सकें। समारोह को संबोधित करते हुए मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. दिलीप केसरी ने कहा कि किसी बेटे की ओर से अपने पिता के जीवन, संघर्ष और आदर्शों को पुस्तक के रूप में संरक्षित करना अत्यंत सराहनीय काम है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक स्व. प्रो. टी.एन. सिन्हा के व्यक्तित्व को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगी। पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने कहा कि उन्हें प्रो. टी.एन. सिन्हा जैसे विद्वान इतिहासकार का सान्निध्य और पड़ोसी होने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि प्रो. सिन्हा ने अपने ज्ञान, अनुशासन और शिक्षण शैली से हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारा और औरंगाबाद को बौद्धिक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन देश के प्रसिद्ध उद्घोषक शंकर कैमूरी ने किया।


