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शहर में फर्जी दस्तावेजों के सहारे वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन और ट्रांसफर का खेल सामने आया है। डीटीओ कार्यालय के कर्मचारियों की सतर्कता से एक ऐसे मामले का पता चला, जिसमें एक ही युवक तीन दिन के अंतराल में दो अलग-अलग नामों के आधार कार्ड लेकर वाहन ट्रांसफर कराने पहुंचा। पहले उसने शंकर घोष के नाम का आधार कार्ड प्रस्तुत किया, जिसमें टेल्को कॉलोनी का पता दर्ज था। तीन दिन बाद वही युवक देवाशीष मजूमदार के नाम का आधार कार्ड लेकर पहुंचा। वह मारुति बलेनो जेटा (जेएच 05 बीएस-6638) के कागजात लेकर आया था, जो रिकॉर्ड में सोनारी में आशियाना गार्डन निवासी देवाशीष मजूमदार के नाम पर दर्ज है। वाहन प्रेम सागर के नाम ट्रांसफर किया जाना था। दस्तावेजों की जांच के दौरान कर्मचारियों का संदेह गहरा गया। युवक को अंदर बुलाया गया, लेकिन वह भीड़ का फायदा उठाकर वहां से निकल गया। इसके बाद कार्यालय में दस्तावेजों की जांच की गई तो ओनर बुक और ट्रांसफर से जुड़े कागजात फर्जी मिले। दोनों आधार कार्डों की तकनीकी और आधिकारिक जांच में भी अंतर सामने आया। शंकर घोष के नाम वाले आधार कार्ड का नंबर ऑनलाइन सिस्टम में जांचने पर अस्तित्व में नहीं मिला। देवाशीष मजूमदार के नाम का आधार कार्ड पश्चिम बंगाल के पते पर जारी मिला।
लोन डिफॉल्ट होने के बाद रिकवरी एजेंसी से जुड़ा एंगल
डीटीओ कार्यालय की शुरुआती छानबीन में पता चला कि बलेनो निजी बैंक से फाइनेंस कराई गई थी। वाहन मालिक लोन की किस्तें नहीं चुका पा रहा था। इसके बाद निजी बैंक की रिकवरी एजेंसी ने गाड़ी अपने कब्जे में ले ली। इसके बावजूद वाहन को औने-पौने दाम में नीलाम किया गया। अब उस जब्ती गाड़ी को ठिकाने लगाने और बाजार में बेचने के लिए फर्जी कागजातों और डुप्लीकेट ओनर बुक का सहारा लिया जा रहा था, ताकि खरीदार के नाम पर री-रजिस्ट्रेशन कराया जा सके। इस गंभीर मामले को प्रशासन ने प्राथमिकता से लिया है। कार्यालय स्तर पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संलिप्त सभी फर्जी कागजात जब्त कर लिए गए हैं। संगठित गिरोह और इसके पीछे सक्रिय मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए विभागीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया तेज की गई है। – महेश्वर यादव, डीटीओ जमशेदपुर
कार किसी की, बेच रहा था कोई और:फर्जीवाड़े का खुलासा, फर्जी ओनर बुक से वाहन ट्रांसफर का खेल
