किशनगंज जिले के सरकारी विद्यालयों में समग्र शिक्षा अभियान के तहत लाखों रुपये के संगीत वाद्य यंत्र भेजे गए हैं। इनमें हारमोनियम, तबला जोड़ी, ढोलक, बैंजो/गिटार, मंजीरा, झांझ और घुंघरू जैसे उपकरण शामिल हैं। हालांकि, इन विद्यालयों में संगीत शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण ये वाद्य यंत्र वर्तमान में कमरों और कार्यालयों में निष्क्रिय पड़े हैं। प्रशिक्षित शिक्षकों के अभाव में लाखों रुपये के ये उपकरण बच्चों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। वाद्य यंत्रों को बजाने में प्रशिक्षित नहीं सामान्य शिक्षक स्कूल शिक्षकों के अनुसार, सामान्य शिक्षक इन वाद्य यंत्रों को बजाने में प्रशिक्षित नहीं हैं। इस कारण बच्चों को न तो उचित संगीत प्रशिक्षण मिल पा रहा है और न ही इन उपकरणों का नियमित उपयोग हो रहा है। इससे उपकरणों के खराब होने या लंबे समय तक निष्क्रिय पड़े रहने की आशंका बढ़ गई है। कुछ विद्यालयों से वाद्य यंत्रों के क्षतिग्रस्त पहुंचने की शिकायतें भी मिली हैं। शिक्षकों ने तबला, ढोलक और अन्य उपकरणों में खराबी की जानकारी दी है, जिससे योजना की गुणवत्ता और खरीद प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग गया है। वाद्य यंत्रों को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था की कमी ग्रामीण क्षेत्रों के कई विद्यालयों में इन वाद्य यंत्रों को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था का भी अभाव है। स्कूल प्रबंधन ने सुझाव दिया है कि यदि सरकार संगीत शिक्षकों की नियुक्ति करे या मौजूदा शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करे, तभी इस योजना का वास्तविक लाभ छात्रों तक पहुंच पाएगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत बच्चों के मानसिक और सांस्कृतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, प्रशिक्षित शिक्षकों के बिना केवल उपकरण उपलब्ध कराने से योजना का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा। वर्तमान स्थिति में ये वाद्य यंत्र छात्रों की प्रतिभा निखारने के बजाय अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।
किशनगंज के स्कूलों में म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स मौजूद, टीचर नहीं:लाखों की किट बेकार, स्कीम के इम्प्लीमेंटेशन पर सवाल
किशनगंज जिले के सरकारी विद्यालयों में समग्र शिक्षा अभियान के तहत लाखों रुपये के संगीत वाद्य यंत्र भेजे गए हैं। इनमें हारमोनियम, तबला जोड़ी, ढोलक, बैंजो/गिटार, मंजीरा, झांझ और घुंघरू जैसे उपकरण शामिल हैं। हालांकि, इन विद्यालयों में संगीत शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण ये वाद्य यंत्र वर्तमान में कमरों और कार्यालयों में निष्क्रिय पड़े हैं। प्रशिक्षित शिक्षकों के अभाव में लाखों रुपये के ये उपकरण बच्चों के लिए अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। वाद्य यंत्रों को बजाने में प्रशिक्षित नहीं सामान्य शिक्षक स्कूल शिक्षकों के अनुसार, सामान्य शिक्षक इन वाद्य यंत्रों को बजाने में प्रशिक्षित नहीं हैं। इस कारण बच्चों को न तो उचित संगीत प्रशिक्षण मिल पा रहा है और न ही इन उपकरणों का नियमित उपयोग हो रहा है। इससे उपकरणों के खराब होने या लंबे समय तक निष्क्रिय पड़े रहने की आशंका बढ़ गई है। कुछ विद्यालयों से वाद्य यंत्रों के क्षतिग्रस्त पहुंचने की शिकायतें भी मिली हैं। शिक्षकों ने तबला, ढोलक और अन्य उपकरणों में खराबी की जानकारी दी है, जिससे योजना की गुणवत्ता और खरीद प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग गया है। वाद्य यंत्रों को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था की कमी ग्रामीण क्षेत्रों के कई विद्यालयों में इन वाद्य यंत्रों को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था का भी अभाव है। स्कूल प्रबंधन ने सुझाव दिया है कि यदि सरकार संगीत शिक्षकों की नियुक्ति करे या मौजूदा शिक्षकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करे, तभी इस योजना का वास्तविक लाभ छात्रों तक पहुंच पाएगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत बच्चों के मानसिक और सांस्कृतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, प्रशिक्षित शिक्षकों के बिना केवल उपकरण उपलब्ध कराने से योजना का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा। वर्तमान स्थिति में ये वाद्य यंत्र छात्रों की प्रतिभा निखारने के बजाय अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।

