
Kolkata Stampede Detention News: उत्तर कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में महासप्तमी की शाम मची भगदड़ मामले में कोलकाता पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. 19 श्रद्धालुओं की मौत और 24 अन्य लोगों के गंभीर रूप से घायल होने के बाद पुलिस ने शनिवार देर रात पूजा समिति के आयोजकों समेत 12 लोगों को हिरासत में ले लिया. रविवार को इनमें से 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश के तुरंत बाद कोलकाता पुलिस ने यह कार्रवाई की.
इन 7 लोगों को किया गया गिरफ्तार
- राज कुमार सेवदा उर्फ राजा (48), दुर्गा पूजा कमेटी के सचिव
- शांतनु दुबे (55), दुर्गा पूजा कमेटी के उपाध्यक्ष
- विप्लव मुखर्जी उर्फ जॉय (48), बांस का ढांचा बनाने में शामिल व्यक्ति
- कौशिक साहा (53), भीड़ मैनेजमेंट और वीआईपी पास चेक करने के लिए तैनात व्यक्ति
- पिंटू दे (51), भीड़ मैनेजमेंट करने में सक्रिय व्यक्ति
- सुमन चक्रवर्ती (30), प्राइवेट सिक्यूरिटी कंपनी का कर्मचारी
- राजेश पाल (29), प्राइवेट सिक्यूरिटी कंपनी का कर्मचारी
कोलकाता पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत केस दर्ज कर लिया है. पुलिस ने बीएनएस की धारा 105, 110 और 3(5) के तहत केस दर्ज किया है.
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किसी को बख्शा नहीं जायेगा : कोलकाता पुलिस
कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस की एंटी-राउडी सेक्शन (ARS) ने घटनास्थल और पंडाल के सभी सीसीटीवी (CCTV) फुटेज अपने कब्जे में ले लिये हैं.
हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता में बनी SIT करेगी जांच
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कलकत्ता हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित विशेष जांच दल (SIT) करेगी. इस एसआईटी में एसटीएफ (STF), सीआईडी (CID) और अन्य एजेंसियों के विशेषज्ञ अधिकारी शामिल होंगे.
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जवाबदेही तय होगी : पुलिस
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और हिरासत में लिये गये लोगों से पूछताछ के जरिये भीड़ नियंत्रण में नाकाम रहे जिम्मेदार लोगों की पहचान की जायेगी. चाहे वे पूजा समिति के सदस्य हों, होमगार्ड, अस्थायी कर्मचारी, पुलिसकर्मी या फिर निजी सुरक्षा गार्ड. लापरवाही सामने आने पर किसी को बख्शा नहीं जायेगा.
कैसी मची तबाही?
महासप्तमी की शाम तेज बारिश से बचने के लिए हजारों श्रद्धालु एक साथ पंडाल और शेड के भीतर घुसने लगे. अचानक बढ़ी अनियंत्रित भीड़ और निकास मार्गों में हुई रुकावट के कारण यह हादसा हुआ, जिसमें 19 लोगों ने अपनी जान गंवा दी.
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