खगड़िया के परबत्ता प्रखंड स्थित कुल्हड़िया पंचायत के प्रगतिशील किसान धनंजय कुमार तिवारी ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए एक नई पहल की है। उन्होंने अपने खेत में शेड नेट फार्मिंग तकनीक से बीजरहित खीरे (सीडलेस कुकंबर) की खेती शुरू की है। यह खगड़िया जिले में इस तकनीक का पहला प्रयोग बताया जा रहा है, जिसकी कृषि विभाग और स्थानीय किसान सराहना कर रहे हैं। शेड नेट फार्मिंग आधुनिक संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन) की एक उन्नत विधि है। इसमें एचडीपीई (HDPE) फैब्रिक से बने विशेष ढांचे के भीतर नियंत्रित वातावरण तैयार किया जाता है। यह तकनीक फसलों को तेज धूप, अत्यधिक गर्मी, नमी की कमी, प्रतिकूल मौसम और कीट-रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे उत्पादन के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। खेत की अच्छी तरह की जाती है जुताई धनंजय कुमार तिवारी ने बताया कि खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई की गई। इसके बाद मेड बनाकर मल्चिंग शीट बिछाई गई और निर्धारित दूरी पर पौधों की रोपाई की गई। पौधों के बढ़ने पर उन्हें बांस और डोरी के सहारे सहारा दिया जाता है, जिससे बेलों का बेहतर विकास होता है और रोगों की संभावना कम रहती है। इस तकनीक में बुवाई के लगभग 45 दिनों बाद ही उत्पादन मिलना शुरू हो जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, शेड नेट तकनीक में खीरा, शिमला मिर्च, मिर्च, टमाटर सहित कई सब्जियों के अलावा ऑर्किड, एंथोरियम और जरबेरा जैसे फूलों की खेती भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। यह तकनीक जैविक खेती को भी बढ़ावा देती है और किसानों को बाजार में अपनी उपज के लिए बेहतर कीमत प्राप्त करने में मदद करती है। किसानों की आय में होती है वृद्धि सहायक तकनीक प्रबंधक दीपक कुमार स्कंद ने इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि शेड नेट फार्मिंग भविष्य की खेती है। नियंत्रित वातावरण में फसल उत्पादन होने से गुणवत्ता उत्कृष्ट रहती है और कम क्षेत्र में भी अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है। प्रखंड उद्यान पदाधिकारी अनीश कुमार ने बताया कि उद्यान विभाग की एफएलडी योजना के तहत शेड नेट फार्मिंग के लिए किसानों को अनुदान दिया जाता है। एक इकाई की लागत लगभग 25 लाख रुपये होती है, जिसमें किसान को केवल एक-तिहाई राशि का योगदान देना पड़ता है, जबकि शेष राशि विभाग द्वारा सब्सिडी के रूप में वहन की जाती है। उन्होंने किसानों से इस योजना का लाभ उठाकर आधुनिक खेती अपनाने की अपील की। कुल्हड़िया पंचायत में शुरू हुई यह पहल अब पूरे खगड़िया जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। धनंजय कुमार तिवारी की इस पहल से क्षेत्र के अन्य किसान भी आधुनिक तकनीक के जरिए लाभकारी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
खगड़िया में शेड नेट से बीजरहित खीरा की खेती शुरू:परबत्ता के किसान ने अपनाई आधुनिक तकनीक, कृषि विभाग ने सराहा
खगड़िया के परबत्ता प्रखंड स्थित कुल्हड़िया पंचायत के प्रगतिशील किसान धनंजय कुमार तिवारी ने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए एक नई पहल की है। उन्होंने अपने खेत में शेड नेट फार्मिंग तकनीक से बीजरहित खीरे (सीडलेस कुकंबर) की खेती शुरू की है। यह खगड़िया जिले में इस तकनीक का पहला प्रयोग बताया जा रहा है, जिसकी कृषि विभाग और स्थानीय किसान सराहना कर रहे हैं। शेड नेट फार्मिंग आधुनिक संरक्षित खेती (प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन) की एक उन्नत विधि है। इसमें एचडीपीई (HDPE) फैब्रिक से बने विशेष ढांचे के भीतर नियंत्रित वातावरण तैयार किया जाता है। यह तकनीक फसलों को तेज धूप, अत्यधिक गर्मी, नमी की कमी, प्रतिकूल मौसम और कीट-रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है, जिससे उत्पादन के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। खेत की अच्छी तरह की जाती है जुताई धनंजय कुमार तिवारी ने बताया कि खेती शुरू करने से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई की गई। इसके बाद मेड बनाकर मल्चिंग शीट बिछाई गई और निर्धारित दूरी पर पौधों की रोपाई की गई। पौधों के बढ़ने पर उन्हें बांस और डोरी के सहारे सहारा दिया जाता है, जिससे बेलों का बेहतर विकास होता है और रोगों की संभावना कम रहती है। इस तकनीक में बुवाई के लगभग 45 दिनों बाद ही उत्पादन मिलना शुरू हो जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, शेड नेट तकनीक में खीरा, शिमला मिर्च, मिर्च, टमाटर सहित कई सब्जियों के अलावा ऑर्किड, एंथोरियम और जरबेरा जैसे फूलों की खेती भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। यह तकनीक जैविक खेती को भी बढ़ावा देती है और किसानों को बाजार में अपनी उपज के लिए बेहतर कीमत प्राप्त करने में मदद करती है। किसानों की आय में होती है वृद्धि सहायक तकनीक प्रबंधक दीपक कुमार स्कंद ने इस पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि शेड नेट फार्मिंग भविष्य की खेती है। नियंत्रित वातावरण में फसल उत्पादन होने से गुणवत्ता उत्कृष्ट रहती है और कम क्षेत्र में भी अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है। प्रखंड उद्यान पदाधिकारी अनीश कुमार ने बताया कि उद्यान विभाग की एफएलडी योजना के तहत शेड नेट फार्मिंग के लिए किसानों को अनुदान दिया जाता है। एक इकाई की लागत लगभग 25 लाख रुपये होती है, जिसमें किसान को केवल एक-तिहाई राशि का योगदान देना पड़ता है, जबकि शेष राशि विभाग द्वारा सब्सिडी के रूप में वहन की जाती है। उन्होंने किसानों से इस योजना का लाभ उठाकर आधुनिक खेती अपनाने की अपील की। कुल्हड़िया पंचायत में शुरू हुई यह पहल अब पूरे खगड़िया जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। धनंजय कुमार तिवारी की इस पहल से क्षेत्र के अन्य किसान भी आधुनिक तकनीक के जरिए लाभकारी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

