जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत चंपापुर गांव के बेड़वा टोला में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। करीब 250 की आबादी वाले इस आदिवासी, अल्पसंख्यक और हरिजन बहुल टोला के लगभग 30 परिवार शुद्ध पानी के लिए जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए खेत में बने डोभा का दूषित पानी लाना पड़ रहा है। यह पानी न केवल गंदा है, बल्कि इसके सेवन से बीमारी फैलने का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में इसी पानी का उपयोग पीने और घरेलू कामों में करना पड़ रहा है, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। पेयजल की समस्या की तस्वीरें देखें… दो चापाकल, एक खराब दूसरा मस्जिद कैंपस में ग्रामीणों के अनुसार टोला में पेयजल के लिए दो चापाकल लगाए गए थे, लेकिन उनमें से एक लंबे समय से खराब पड़ा है। दूसरा चापाकल मस्जिद कैंपस में है। जहां नमाज और लगातार आवाजाही के कारण सभी लोगों के लिए आसानी से पानी लेना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में अधिकांश ग्रामीणों को काफी दूरी तय कर डोभा का पानी लाना पड़ता है। सनातन हांसदा, अनवर अंसारी और पैगाम अंसारी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि आबादी के हिसाब से चापाकलों की संख्या बेहद कम है। कम से कम तीन चालू चापाकल होने चाहिए, तभी लोगों को राहत मिल सकती है। वर्तमान स्थिति में पानी के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है। प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग ग्रामीणों ने बताया कि अभी किसी तरह स्थिति संभाली जा रही है, लेकिन बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाएंगे। जेगुन बीवी ने कहा कि बारिश के दौरान डोभा तक जाने वाला रास्ता फिसलन भरा हो जाता है, जिससे कई बार लोग गिरकर घायल भी हो जाते हैं। सावित्री देवी ने बताया कि मस्जिद परिसर में स्थित चापाकल पर अक्सर लंबा इंतजार करना पड़ता है। जिससे लोग मजबूर होकर डोभा का पानी लाते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से अविलंब हस्तक्षेप कर खराब चापाकल की मरम्मत, दो नए चापाकल लगाने और स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं नारायणपुर पीएचईडी विभाग के कनीय अभियंता ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। जल्द ही निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
खेत का पानी पी रहा जामताड़ा का 30 परिवार:बेड़वा टोला में एक चापाकल खराब, दूसरा मस्जिद कैंपस में, पानी लेने में आती है दिक्कत
जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत चंपापुर गांव के बेड़वा टोला में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। करीब 250 की आबादी वाले इस आदिवासी, अल्पसंख्यक और हरिजन बहुल टोला के लगभग 30 परिवार शुद्ध पानी के लिए जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए खेत में बने डोभा का दूषित पानी लाना पड़ रहा है। यह पानी न केवल गंदा है, बल्कि इसके सेवन से बीमारी फैलने का खतरा भी बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में इसी पानी का उपयोग पीने और घरेलू कामों में करना पड़ रहा है, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। पेयजल की समस्या की तस्वीरें देखें… दो चापाकल, एक खराब दूसरा मस्जिद कैंपस में ग्रामीणों के अनुसार टोला में पेयजल के लिए दो चापाकल लगाए गए थे, लेकिन उनमें से एक लंबे समय से खराब पड़ा है। दूसरा चापाकल मस्जिद कैंपस में है। जहां नमाज और लगातार आवाजाही के कारण सभी लोगों के लिए आसानी से पानी लेना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में अधिकांश ग्रामीणों को काफी दूरी तय कर डोभा का पानी लाना पड़ता है। सनातन हांसदा, अनवर अंसारी और पैगाम अंसारी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि आबादी के हिसाब से चापाकलों की संख्या बेहद कम है। कम से कम तीन चालू चापाकल होने चाहिए, तभी लोगों को राहत मिल सकती है। वर्तमान स्थिति में पानी के लिए रोजाना संघर्ष करना पड़ रहा है। प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग ग्रामीणों ने बताया कि अभी किसी तरह स्थिति संभाली जा रही है, लेकिन बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाएंगे। जेगुन बीवी ने कहा कि बारिश के दौरान डोभा तक जाने वाला रास्ता फिसलन भरा हो जाता है, जिससे कई बार लोग गिरकर घायल भी हो जाते हैं। सावित्री देवी ने बताया कि मस्जिद परिसर में स्थित चापाकल पर अक्सर लंबा इंतजार करना पड़ता है। जिससे लोग मजबूर होकर डोभा का पानी लाते हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से अविलंब हस्तक्षेप कर खराब चापाकल की मरम्मत, दो नए चापाकल लगाने और स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं नारायणपुर पीएचईडी विभाग के कनीय अभियंता ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। जल्द ही निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

