गयाजी के ऐतिहासिक सीताकुंड वाटिका में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष शिविर में बड़ी संख्या में आम लोगों ने हिस्सा लिया और सामूहिक रूप से योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। मंत्रोच्चार के साथ भव्य शुरुआत कार्यक्रम का शुभारंभ बेहद आध्यात्मिक माहौल में हुआ। हुमा फातमी ने गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के सस्वर पाठ के साथ योग सत्र की शुरुआत की। इससे पूरा वाटिका परिसर सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। इसके बाद योग गुरु आचार्य जितेंद्र के कुशल मार्ग दर्शन में उपस्थित जनसमूह ने विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया। योग निद्रा और प्राणायाम पर रहा विशेष जोर आचार्य जितेंद्र ने साधकों को प्राणायाम, ध्यान और आसन की बारीकियों से अवगत कराया। इस शिविर का मुख्य आकर्षण योग निद्रा का विशेष अभ्यास रहा। जिसके माध्यम से लोगों को गहरे मानसिक तनाव से मुक्ति की कला सिखाई गई। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास केवल शारीरिक कसरत नहीं है, बल्कि यह मानसिक तनाव को मिटा कर व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करता है। आज के समय में हर व्यक्ति को खुद के लिए और समाज को स्वस्थ बनाने के लिए योग को अपनाना ही होगा। शास्त्रों के आईने में योग की महिमा शिविर में मौजूद स्वामी सुदर्शन महाराज ने कहा कि इंसानी इंद्रियां अपने स्वभाव के कारण मनुष्य को भटकाती हैं। योग ही एकमात्र ऐसा साधन है जो इस भटकाव को रोककर शरीर में अद्भुत ऊर्जा का संचार करता है। योग के नियमित अभ्यास से इंद्रियां मन की गुलाम नहीं रहती, बल्कि पूरी तरह मनुष्य के नियंत्रण में आ जाती हैं। वैज्ञानिक और वैदिक दृष्टिकोण का अनूठा संगम वहीं, कार्यक्रम में मौजूद बीस सूत्री के सदस्य जदयू नेता धनंजय शर्मा ने बताया कि सीताकुंड परिसर में वैसे तो हर सुबह योग की शिक्षा दी जाती है, लेकिन 21 जून को आयोजित इस ‘योग महोत्सव’ का स्वरूप बेहद अद्भुत और अलौकिक है। इसके पीछे वैज्ञानिक और वैदिक दोनों ही महत्वपूर्ण कारक काम करते हैं। यही वजह है कि आज पूरा विश्व इसे एक उत्सव के रूप में मना रहा है।
गयाजी के सीताकुंड वाटिका में गूंजे मंत्र:अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर जुटे लोग, मंत्रोच्चार के साथ भव्य शुरुआत; स्वस्थ जीवन का मिला संदेश
गयाजी के ऐतिहासिक सीताकुंड वाटिका में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष शिविर में बड़ी संख्या में आम लोगों ने हिस्सा लिया और सामूहिक रूप से योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। मंत्रोच्चार के साथ भव्य शुरुआत कार्यक्रम का शुभारंभ बेहद आध्यात्मिक माहौल में हुआ। हुमा फातमी ने गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र के सस्वर पाठ के साथ योग सत्र की शुरुआत की। इससे पूरा वाटिका परिसर सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। इसके बाद योग गुरु आचार्य जितेंद्र के कुशल मार्ग दर्शन में उपस्थित जनसमूह ने विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया। योग निद्रा और प्राणायाम पर रहा विशेष जोर आचार्य जितेंद्र ने साधकों को प्राणायाम, ध्यान और आसन की बारीकियों से अवगत कराया। इस शिविर का मुख्य आकर्षण योग निद्रा का विशेष अभ्यास रहा। जिसके माध्यम से लोगों को गहरे मानसिक तनाव से मुक्ति की कला सिखाई गई। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास केवल शारीरिक कसरत नहीं है, बल्कि यह मानसिक तनाव को मिटा कर व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करता है। आज के समय में हर व्यक्ति को खुद के लिए और समाज को स्वस्थ बनाने के लिए योग को अपनाना ही होगा। शास्त्रों के आईने में योग की महिमा शिविर में मौजूद स्वामी सुदर्शन महाराज ने कहा कि इंसानी इंद्रियां अपने स्वभाव के कारण मनुष्य को भटकाती हैं। योग ही एकमात्र ऐसा साधन है जो इस भटकाव को रोककर शरीर में अद्भुत ऊर्जा का संचार करता है। योग के नियमित अभ्यास से इंद्रियां मन की गुलाम नहीं रहती, बल्कि पूरी तरह मनुष्य के नियंत्रण में आ जाती हैं। वैज्ञानिक और वैदिक दृष्टिकोण का अनूठा संगम वहीं, कार्यक्रम में मौजूद बीस सूत्री के सदस्य जदयू नेता धनंजय शर्मा ने बताया कि सीताकुंड परिसर में वैसे तो हर सुबह योग की शिक्षा दी जाती है, लेकिन 21 जून को आयोजित इस ‘योग महोत्सव’ का स्वरूप बेहद अद्भुत और अलौकिक है। इसके पीछे वैज्ञानिक और वैदिक दोनों ही महत्वपूर्ण कारक काम करते हैं। यही वजह है कि आज पूरा विश्व इसे एक उत्सव के रूप में मना रहा है।


