राज्य आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका कर्मचारी संघ के आह्वान पर आज गयाजी शहर के गांधी मैदान स्थित गेट संख्या-7 पर आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं ने धरना-प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन जिला मंत्री मंजू कुमारी की देखरेख में किया गया, जबकि धरना की अध्यक्षता अनीता झा ने की। बड़ी संख्या में उपस्थित सेविका और सहायिकाओं ने सरकार और प्रशासन के सामने अपनी लंबित मांगों को उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा। समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही धरना के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मी सालों से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य और पोषण संबंधी योजनाओं को धरातल पर सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। प्रमुख मांगों में आईसीडीएस के निजीकरण की किसी भी कोशिश पर तत्काल रोक लगाना शामिल है। जिला मंत्री मंजू कुमारी ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाने के बजाय निजीकरण की नीति अपनाना गरीब और वंचित वर्ग के हितों के खिलाफ है। उन्होंने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की। सहायिकाओं का मानदेय लंबे समय से बकाया मंजू कुमारी ने बताया कि कई सेविका और सहायिकाओं का मानदेय लंबे समय से बकाया है, जिसका भुगतान तत्काल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से घोषित गर्मी की छुट्टी केवल कागजों तक सीमित रहती है, क्योंकि इस दौरान भी आंगनबाड़ी कर्मियों से विभिन्न प्रकार के काम लिए जाते हैं। इसलिए उन्हें भी अन्य कर्मचारियों की तरह वास्तविक अवकाश का फायदा मिलना चाहिए। नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि अन्य राज्यों में आंगनबाड़ी कर्मियों को ग्रेच्युटी और कई अन्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जबकि बिहार में अब तक ऐसी व्यवस्था लागू नहीं की गई है। मांग-पत्र सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की प्रदर्शन के बाद, जिला संघ, गया के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को एक मांग-पत्र सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार से मानदेय में वृद्धि की मांग करते हुए कहा कि पिछले दस साल से मानदेय में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है।
धरना के अंत में संघ की ओर से स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

