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गिरिडीह जिले के सदर अस्पताल में इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल में भर्ती एक छात्रा को बिना रैपर वाली स्लाइन चढ़ा दी गई, जिससे उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। बताया जाता है कि गिरिडीह शहर के अरगाघाट रोड निवासी सुरेंद्र श्रीवास्तव की पुत्री नम्रता अखोरी की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। इसके बाद उसकी मां आभा देवी उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचीं। अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने स्थिति को देखते हुए छात्रा को तुरंत भर्ती करने की सलाह दी। परिजनों ने उसे वार्ड में भर्ती करा दिया। छात्रा की हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ परिजनों का आरोप है कि भर्ती के कुछ ही देर बाद छात्रा को स्लाइन चढ़ाया गया, लेकिन स्लाइन चढ़ते ही उसकी तबीयत और बिगड़ने लगी। छात्रा को तेज ठंड लगने लगी और उसकी हालत देखकर परिजन घबरा गए। इसके बाद परिजन उसे तत्काल दूसरे डॉक्टर के पास लेकर गए, जहां डॉक्टर ने दवा और दूसरी स्लाइन दी। इससे छात्रा की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। इसी दौरान परिजनों ने पहले चढ़ाई गई स्लाइन की बोतल की जांच की तो वे हैरान रह गए। उनके अनुसार, उस स्लाइन की बोतल पर कोई रैपर नहीं लगा हुआ था, जिससे दवा की गुणवत्ता और वैधता पर सवाल खड़े हो गए। यह देखते ही परिजन आक्रोशित हो उठे और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर हंगामा करने लगे। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में न तो दवाओं की सही जांच की जा रही है और न ही मरीजों की सुरक्षा का ख्याल रखा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत की, तो कुछ डॉक्टरों ने उल्टा उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें डांट-फटकार कर भगा दिया। इससे परिजनों का गुस्सा और बढ़ गया। घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर में अफरातफरी का माहौल बन गया। आसपास मौजूद अन्य मरीज और उनके परिजन भी इस घटना को लेकर चिंतित नजर आए। लोगों ने कहा कि यदि इस तरह की लापरवाही जारी रही, तो मरीजों की जान को खतरा बना रहेगा। इधर, मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. बच्चा सिंह ने कहा कि घटना की जानकारी उन्हें मिली है और इसे गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में एक्सपायरी दवाओं को पहले ही हटा दिया जाता है और बिना रैपर वाली किसी भी दवा का उपयोग नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
