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लोहरदगा|करीब 100 साल बाद दुर्लभ महासंयोग इस बार अक्षय तृतीया का दिन 19 तथा 20 अप्रैल पड़ रहा है। इस दिन जौ, पीली कौड़ी, तांबा पीतल के बर्तन, सोना चांदी के आभूषण, वाहन, संपत्ति आदि खरीदने व पूजा पाठ एवं दान करने से अक्षय फल मिलता है तथा जीवन में सुख समृद्धि आती है। सर्राफ़ा व्यवसायी संजय बर्म्मन ने बताया कि अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है जो लोहरदगा के लिए शुभ संकेत भी है कि यहां समृद्धि बढ़ रही है। साथ ही शादी विवाह के मौसम में बहुत सारे ग्राहक विवाह के लिए आभूषण अक्षय तृतीया वे पूर्व ही चिह्नित करके रिजर्व करवा लिए हैं ताकि भीड़ से बचा जाए। सोना दस ग्राम (22 कैरेट) एक लाख बयालीस हजार पांच सौ है तथा चांदी सत्ताइस सौ रुपए है। एक अनुमान के मुताबिक बर्तन, आभूषण, घर तथा किचन के लिए सामान, छोटे बड़े वाहन आदि पर 8 से दस करोड़ से ऊपर की खरीदारी होने की संभावना है। गुमला|गौ सम्मान आह्वान अभियान के तहत शनिवार को गुमला प्रभारी अशोक त्रिपाठी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल एसडीओ राजीव नीरज से कार्यालय कक्ष में मुलाकात कर अगामी 27 अप्रैल को बड़ा दुर्गा मंदिर परिसर से शांति पूर्ण तरीके से रैली निकालने को लेकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से बताया है कि गौ माता को राष्ट्रीय माता घोषित करने को लेकर पूरे देश में अभियान चलाया जा रहा है। इस निमित गुमला में भी अभियान से हजारों लोग जुड़ रहे है। रैली के माध्यम से देश के राष्ट्रपति, पीएम, गृह मंत्री, राज्यपाल व सीएम को मांग पत्र सौंपा जाएगा। अशोक ने बताया कि रैली में गौ माता के साथ संत व अन्य हिन्दू भाई-बहन मौजूद रहेंगे। यह रैली शांतिपूर्ण तरीके से बड़ा दुर्गा मंदिर परिसर से होते हुए बड़ाइक मुहल्ला, मेन रोड होकर एसडीओ कार्यालय के पास समाप्त होगी। ज्ञापन सौंपने में मुख्य रूप से पूनम सिंह, अधिवक्ता अशोक कुमार, श्याम मंत्री समेत दर्जनों लोग मौजूद थे। लोहरदगा|ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान द्वारा 12 दिवसीय बकरी पालन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ शनिवार को बैंक ऑफ इंडिया स्टार किसान विकास केंद्र लोहरदगा प्रभारी शिल्पी रानी खलखो, जेएसएलपीएस के जिला प्रबंधक बिपिन चंद्र व संस्थान के निदेशक सुरेश भगत द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। वहीं बताया गया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं एवं किसानों को आत्मनिर्भर बनाना व उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को बकरी पालन के वैज्ञानिक तरीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी। साथ ही प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा बकरियों की उन्नत नस्लों, उनके समुचित पालन-पोषण, संतुलित आहार प्रबंधन, नियमित टीकाकरण एवं रोग नियंत्रण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। वहीं प्रतिभागियों को बताया गया कि कम लागत में बकरी पालन एक लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

