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राज्य वित्त आयोग ने संथाल परगना में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था और ग्रामीण शासन की जमीनी हकीकत की पोल खोल दी है। आयोग ने संथाल परगना के छह जिलों दुमका, देवघर, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़ और जामताड़ा के पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 11वीं अनुसूची में पंचायतों के लिए सूचीबद्ध 29 अधिकारों में से 13 विभागों ने सिर्फ 22 अधिकार ही हस्तांतरित किए। वन, ऊर्जा और श्रम विभाग ने कोई अधिकार हस्तांतरित नहीं किया है। राजस्व विभाग ने भी आंशिक अधिकार दिया है। पंचायतों की निर्णय लेने की क्षमता पर इसका असर पड़ रहा है। वो सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी
एक ही जिले की पंचायतों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर, सुधार करने के सुझाव
पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआई) 2.0 के आंकड़े भी पंचायतों के बीच विकास में असमानता दिखाते हैं। आयोग ने छह जिलों की बेहतर और कमजोर पंचायतों के स्कोर का अंतर भी दर्ज किया है। देवघर में यह अंतर 34.58 अंक है। यहां की मगडीहा पंचायत का स्कोर 71.71 है, जबकि बगदाहा पंचायत का स्कोर 37.13 है। जामताड़ा में भी दो पंचायतों के स्कोर में 34.41 अंक का अंतर है। इसी तरह गोड्डा में 30.52, साहिबगंज में 29, दुमका में 20.01 और पाकुड़ में 12.43 अंक है। चार जिलों में महिला साक्षरता दर 50 प्रतिशत से भी कम, यह चिंताजनक
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज में महिलाओं की साक्षरता दर 50% से कम है। आयोग ने स्कूली शिक्षा विभाग की मदद से विशेष प्रयास करने की जरूरत बताई है। पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी को देखते हुए निर्वाचित प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी अहम है। पंचायतें आय बढ़ाने के लिए अपनी संपत्ति से राजस्व बढ़ाने की राह ढूंढ़ें
आयोग ने जिला परिषदों को अपनी संपत्तियों से राजस्व बढ़ाने का सुझाव दिया है। कहा गया है कि दुकानों, डाक बंगलों, विवाह भवन, बस स्टैंड और अन्य परिसंपत्तियों का बेहतर प्रबंधन कर आय बढ़ा सकती है। जिला परिषदों को भवन के नक्शों की स्वीकृति के अधिकार हैं, लेकिन इस्तेमाल नहीं होता। पेसा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत… आयोग ने अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों को मजबूत करने के लिए पेसा नियम को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत बताई। साथ ही पंचायती राज विभाग और पेयजल विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर जोर दिया है। ताकि पंचायतों के साथ मिलकर योजनाओं का क्रियान्वयन हो।
ग्रामीण शासन व्यवस्था की हकीकत की पोल खोली:पंचायतों को 13 विभागों ने 29 में 22 अधिकार ही दिए, 3 ने एक भी नहीं

