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पटना के आवासीय इलाकों में मकान या परिसर का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले संपत्तिधारकों पर नगर निगम की कार्रवाई का दायरा अब और बढ़ने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम की ओर से कराए जा रहे सर्वे में 50 हजार से अधिक नई संपत्तियां चिह्नित की गई हैं। इनमें आवासीय उपयोग के बजाय दुकान, कार्यालय, संस्थान या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी सामने आई है। नगर निगम अब इन नए मामलों की भी जांच करेगा। इसके साथ ही पहले जारी किए गए नोटिस के मामलों में भी आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी। 27,395 संपत्तिधारकों को पहले ही नोटिस नगर निगम की ओर से अब तक 27,395 संपत्तिधारकों को नोटिस जारी किया जा चुका है। नोटिस के बाद निर्धारित तिथियों पर करीब 4,100 संपत्तिधारक ही संबंधित अंचल कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रख चुके हैं। संपत्तिधारकों को नोटिस के आधार पर यह स्पष्ट करने का मौका दिया जा रहा है कि उनकी संपत्ति में किस तरह की गतिविधि संचालित हो रही है और वह नियमों के अनुरूप है या नहीं। 50 हजार नए मामलों की होगी पड़ताल नए सर्वे में 50 हजार से अधिक संपत्तियां सामने आने के बाद नगर निगम के सामने जांच का दायरा काफी बढ़ गया है। अब पुराने नोटिस वाले मामलों के साथ नए चिह्नित मामलों की भी पड़ताल की जाएगी। नगर निगम यह देखेगा कि संबंधित संपत्ति का वास्तविक उपयोग क्या है, वहां किस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है और उसके लिए नियमों के तहत अनुमति जरूरी है या नहीं। छह अंचलों से मांगी गई कार्रवाई की रिपोर्ट अपर नगर आयुक्त राजन सिन्हा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। नगर आयुक्त ने नगर निगम के सभी छह अंचलों के कार्यपालक पदाधिकारियों से अब तक की कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में कितने संपत्तिधारकों को नोटिस दिया गया, कितने लोग अपना पक्ष रखने पहुंचे और किन संपत्तियों पर आगे कार्रवाई की जानी है, इसकी जानकारी शामिल होगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। भवन उपविधि और मास्टर प्लान के आधार पर तय होगा मामला नगर निगम के सभी अंचलों के अधिकारी बिहार भवन उपविधि-2014 और पटना मास्टर प्लान-2031 के प्रावधानों का अध्ययन कर रहे हैं। टाउन प्लानरों के साथ भी बैठकें की जा रही हैं, ताकि आवासीय क्षेत्र में अनुमन्य और प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट किया जा सके। नगर निगम का फोकस यह तय करने पर है कि कौन-सी व्यावसायिक गतिविधि नियमों के तहत की जा सकती है और किन गतिविधियों के लिए संबंधित प्राधिकार से अनुमति लेना जरूरी है। आवासीय इलाके में 41 गतिविधियों की अनुमति पटना मास्टर प्लान-2031 के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में हर तरह की व्यावसायिक गतिविधि प्रतिबंधित नहीं है। निर्धारित नियमों के तहत 41 प्रकार की गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। इसके अलावा 19 प्रकार की गतिविधियों के लिए संबंधित प्राधिकरण से अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना अनुमति इन गतिविधियों को संचालित करने पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं, 18 प्रकार की गतिविधियों को आवासीय क्षेत्र में प्रतिबंधित किया गया है। 24 आवासीय कॉलोनियां भी निगरानी में मास्टर प्लान-2031 में पटना की 24 आवासीय कॉलोनियों का उल्लेख है। इनमें बिहार सरकार की 11, केंद्र सरकार की तीन और निजी क्षेत्र की 10 कॉलोनियां शामिल हैं। इन कॉलोनियों में भी व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम की नजर है। मास्टर प्लान के अनुसार पटना में 49.56 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है, जो शहर के कुल क्षेत्रफल का 47.55 प्रतिशत है। पांच सदस्यीय समिति से समाधान की उम्मीद मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों की मांग के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 25 अगस्त को पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति को पूरे मामले का अध्ययन कर व्यावहारिक और जनहितकारी समाधान सुझाना है। अब संपत्तिधारकों की नजर समिति की रिपोर्ट पर भी टिकी है। हालांकि, नगर निगम की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश और लागू नियमों के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी। नए सर्वे में 50 हजार से अधिक संपत्तियों के चिह्नित होने के बाद अब कार्रवाई केवल पहले जारी किए गए नोटिस तक सीमित नहीं रहेगी। प्रत्येक संपत्ति में संचालित गतिविधि और उस पर लागू नियमों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
घर से दुकान-ऑफिस चलाने वालों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी:पटना में 50 हजार से ज्यादा संपत्तियां निगम की रडार पर, छह अंचलों से डिटेल रिपोर्ट मांगी
