Thursday, August 6, 2026

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घाटोटांड के किसान तेजू महतो उगा रहे हैं स्ट्राबेरी:दूसरे किसानों के आय के रास्ते खोले, उत्साह बढ़ा, अगली बार बड़े पैमाने पर करेंगे खेती ‎


स्ट्रॉबेरी को हमने केवल तस्वीरों में देखा था। सोचा था, ये हमारे खेत में कैसे‎ होगी? लेकिन मन में थी कुछ नया करने की चाह। मैंने दिसंबर में मिले स्ट्रॉबेरी की 1,200 पौधों के साथ 20‎ डिसमिल जमीन पर प्रयोग शुरू किया। मुझे टाटा स्टील फाउंडेशन ने सिर्फ पौधे ही नहीं दिए, बल्कि वैज्ञानिक‎ खेती, वर्मी कंपोस्ट, नियमित निगरानी और बाजार की समझ भी दी। जमशेदपुर और गोपालपुर में हुए प्रशिक्षण ने‎ से मेरे अंदर के किसान को एक उद्यमी में बदलना शुरू कर दिया। अब वे रोजाना 5 से 6 डिब्बे 200 ग्राम‎ स्ट्रॉबेरी ₹100 प्रति डिब्बा की दर से स्थानीय बाजार में बेच रहे हैं। रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड के नवाडीह‎ पंचायत में इन दिनों स्ट्रॉबेरी की खेती की चर्चा गांव-गांव गूंज रही है। मैंने पारंपरिक सब्जी की खेती से खेती शुरू‎ की थी। अब महज पांच दिनों में पांच हजार रुपए का कारोबार कर लिया। मौसमी किसान से बने उद्यमी किसान मैं पहले मौसमी सब्जियों पर निर्भर एक‎ साधारण किसान था। मेहनत के बावजूद आय का पहिया संतोषजनक नहीं चलता था। ऐसे में टाटा स्टील‎ फाउंडेशन ने उनके सामने स्ट्रॉबेरी की खेती का विकल्प रखा। पहली बार में यह विचार उन्हें अटपटा और जोखिम‎ भरा लगा। यह मेरा पहला सीजन है। हर दिन कुछ नया सीखने को मिल रहा है। अगली बार मैं दो एकड़ जमीन पर और बेहतर खेती करूंगा। फाउंडेशन का साथ उन्हें पिछले 4-5 वर्षों से मिल रहा है।‎ पारंपरिक खेती की जगह करेंगे स्ट्रॉबेरी की खेती स्ट्रॉबेरी की खेती से होने वाले फायदे से मैं बहुत उत्साहित हूं।‎ इसलिए मेरी योजना है कि अगली बार दो एकड़ जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती करूंगा। मेरी योजना है कि अगर‎ सबकुछ ठीक रहा तो आने वाले वर्षों में पारंपरिक खेती की जगह स्ट्रॉबेरी की ही खेती करूंगा। पारंपरिक खेती से‎ जो आमदनी होती है बहुत सामान्य होती थी। वह बहुत लाभदायक नहीं थी। पारंपरिक नजरिए से लागत अधिक‎ और आमदनी कम मिलता था। इसलिए स्टॉबेरी की खेती हमारे के लिए बहुत फायदे वाला रहा है।‎ साथी किसान लेने आते हैं अब सलाह‎ स्ट्रॉबेरी ने मेरी आय के रास्ते और खोल दिए हैं। आज मैं अपने गांव में एक मिसाल बन चुका हूं। फाउंडेशन की‎ ओर से स्प्रे मशीन, गुणवत्तापूर्ण बीज, 2 एचपी सोलर पंप और फसल विविधीकरण में मिले सहयोग ने उनकी खेती‎ को एक मजबूत आधार दिया। मुझे देखकर मेरे सा​थ कई किसान जो आमतौर पर पारंपरिक खेती करते हैं वे‎ स्ट्रॉबेरी की खेती के विषय में जानने के लिए आते हैं। वह जानना चाहते हैं कि उन्हें इसके पौधे कहां से प्राप्त होंगे।‎ खेती ​कैसे करें कि आमदनी में इजाफा हो।‎ जानिए… कौन हैं तेजू महतो‎ तेजू महतो इंटर की पढ़ाई कर खेती में जुटे हैं । मांडू के नवाडीह गांव में है। इनके घर में मां, पिताजी, पत्नी, तीन‎ बच्चे, दो लड़का, लड़की विवाहित है । बड़ा बेटा प्रमोद कुमार राजस्थान में इंजीनियरिंग कर रहा है। एक बेटा‎ सूर्यकांत कुमार रांची में जेपीएसी की तैयारी कर रहा है। खेती में माता पिता और भाई किशुन महतो, राजन महतो,‎ बसंत कुमार मदद करते हैं। पत्नी सुशीला देवी भी खेती में समान सहयोग करती हैं। तेजू की खेती को देखकर‎ आसपास के किसान सलाह लेने आते हैं। वे उन्हें खेती में नवाचार के संबंध में बताता रहता हूं।‎‎

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