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चतरा जिले में भारी बारिश ने विकास के दावों की पोल खोल दी है। हंटरगंज प्रखंड के पारसिया गांव का दास टोला पूरी तरह पानी से घिर गया है। निजी जमीन पर बांध बनाए जाने से पानी की निकासी रुक गई है। इससे करीब 40 घरों की 300 की आबादी जलजमाव के बीच फंसी हुई है। हालात ऐसे हैं कि घरों से निकलना भी ग्रामीणों के लिए जोखिम भरा हो गया है। जलजमाव पार करने के दौरान दो बच्चे डूबने से बाल-बाल बच चुके हैं। गांव तक एंबुलेंस पहुंचना भी मुश्किल है। ऐसे में बीमार लोगों और गर्भवतियों को अस्पताल पहुंचाने में बड़ी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि समस्या गंभीर होने के बावजूद अब तक उन्हें कोई ठोस राहत नहीं मिली है। प्रशासन ने जमीन मालिकों को नोटिस जरूर दिया है, लेकिन जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। बैग पीठ पर, हाथ में जूते, नदी पार पहुंच रहे स्कूल हंटरगंज प्रखंड के पारसिया गांव का दास टोला महज उदाहरण भर है। जलजमाव का असर कुंदा, मयूरहंड और टंडवा प्रखंडों में भी देखने को मिल रहा है। यहां कई स्कूलों तक पहुंचना बच्चों के लिए चुनौती बन गया है। कुंदा प्रखंड के उल्लवार, ककनातू, टटेज और रेंगनियातरी समेत दर्जनभर गांवों के बच्चे उफनती नदियां पार कर स्कूल पहुंच रहे हैं। बच्चों के पीठ पर स्कूल बैग और हाथ में जूते होते हैं। ककनातू विद्यालय की छात्रा रागनी और नामधारी बताती हैं कि नदी पार करते समय वे डर के साए में एक-दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ती हैं। कई बार परिजन बच्चों को कंधे या गोद में उठाकर नदी पार कराते हैं। शिक्षक रामजतन यादव और रसोइया सुरजी के अनुसार, जलस्तर बढ़ने पर स्कूल तक मिड-डे मील का राशन भी नहीं पहुंच पाता। यानी नदी सिर्फ बच्चों की राह ही नहीं रोक रही, बल्कि स्कूल की रोजमर्रा की व्यवस्था भी प्रभावित कर रही है। पुल नहीं होने से एंबुलेंस भी नहीं पहुंचता कुंदा प्रखंड की सिंदरी, द्वारपार, हथवार और कुंदा जैसी नदियों पर पुल नहीं होने से बरसात के दिनों में ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में उफनती नदी के कारण एक प्रसूता महिला समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी। रास्ते में ही बच्चे ने जन्म लेने से पहले मां के पेट में दम तोड़ दिया। ग्रामीणों के मुताबिक यह स्थिति पहली बार नहीं बनी है। हर साल बारिश में नदियों का जलस्तर बढ़ते ही गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को जान जोखिम में डालनी पड़ती है। बीडीओ साकेत कुमार सिन्हा ने मामले से डीसी को अवगत कराने की बात कही है। ग्रामीणों का कहना है कि दशकों से पुल और बेहतर आवागमन की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। DMFT फंड से होगा पुल निर्माण, किसी ने सूचना भी नहीं दी बच्चों के स्कूल पहुंचने और स्कूल संचालन में हो रही दिक्कत की तस्वीरें सामने आने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी कंचन कुमारी ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सिस्टम की लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके पास DMFT फंड में पर्याप्त राशि उपलब्ध है। इसके बावजूद किसी मुखिया, जनप्रतिनिधि, स्कूल सचिव या शिक्षक ने उन्हें इस गंभीर समस्या की जानकारी नहीं दी। DEO ने कहा कि मामले में तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बच्चों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करने से बचाने के लिए जल्द स्थायी समाधान निकालने का भी आश्वासन दिया है।
चतरा में उफनती नदी पार कर स्कूल जा रहे बच्चे:पुल नहीं होने से टापू बने कई गांव, पानी से घिरे कई घर, एंबुलेंस पहुंचना भी मुश्किल
