Thursday, May 28, 2026

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चार विषयों में चयन बाकी, मामला कोर्ट में

एजुकेशन रिपोर्टर| भागलपुर बिहार राज्य विवि सेवा आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया में फर्जी अनुभव और दिव्यांगता प्रमाण पत्रों को लेकर हुई फजीहत के बाद जांच की पूरी व्यवस्था ही बदल दी है। अब तक नियुक्ति के बाद डॉक्यूमेंट की जांच होती थी लेकिन अब आयोग ने फैसला लिया है कि अंतिम चयन सूची जारी होने से पहले ही शॉर्टलिस्टेड आवेदकों के सभी दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत आयोग ने इतिहास और कॉमर्स विषयों के शॉर्टलिस्टेड अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट्स की जांच शुरू कर दी है। इसके तुरंत बाद बॉटनी और जूलॉजी विषयों के आवेदकों के दस्तावेजों को भी इसी स्क्रूटनी प्रक्रिया से गुजरना होगा। बताया गया कि आयोग आगामी दिनों में आने वाली नई बहाली में भी इसी प्री-वेरिफिकेशन मॉडल को स्थायी रूप से लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है, ताकि अयोग्य उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया के बीच में ही बाहर किया जा सके। बताया गया कि आयोग ने पहले भी व्यवस्था बनाई थी कि जिन शिक्षकों का चयन होगा उनकी पोस्टिंग से पहले उनके डॉक्यूमेंट की जांच की जाएगी। ज्यादातर विश्वविद्यालयों में इसका पालन नहीं हुआ। जांच की जिम्मेदारी विवि आयोग पर तो आयोग विवि पर थोपते रहे थे। ^इतिहास के आवेदकों के दस्तावेजों का सत्यापन कार्य पूरा कर लिया गया है। कॉमर्स विषय की जांच प्रक्रियाधीन है। आयोग के नए निर्देशानुसार बॉटनी और जूलॉजी के अभ्यर्थियों की जांच भी शॉर्टलिस्टिंग के तुरंत बाद सुनिश्चित की जाएगी। – प्रो. एसएन पांडेय, संयोजक, जांच कमेटी, टीएमबीयू आयोग ने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) को उसके कॉलेजों से जारी सर्टिफिकेट जांचने भेजे थे। इतिहास की जांच पूरी हो चुकी है, वहीं कॉमर्स में एसएम कॉलेज से जारी कुछ दस्तावेज यूनिवर्सिटी को न मिलने के कारण जांच अधूरी है। विश्वविद्यालय ने कॉलेज से डॉक्यूमेंट मांगे हैं। आयोग की इस बहाली प्रक्रिया में अब सिर्फ इतिहास, कॉमर्स, बॉटनी और जूलॉजी में चयन बाकी है। इनमें विज्ञापन की शर्तों, उम्मीदवारी और एलायड विषयों के विवाद को लेकर मामला अदालत में लंबित है। सुनवाई जून में ही होनी है। जानकारों ने बताया कि जल्द ही होने वाली नई बहाली के लिए भी अब आयोग शॉर्ट लिस्टिंग के बाद ही डॉक्यूमेंट की जांच पर विचार कर रहा है। पूर्व में बहाल हुए अधिकांश शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी है। तत्कालीन प्रभारी कुलपति प्रो. बीएस झा ने साल 2022 और उसके बाद नियुक्त हुए सभी शिक्षकों के सर्टिफिकेट्स को री-वेरीफाई करने का कड़ा आदेश दिया था, जो फाइलों में दबा रह गया। पॉलिटिकल साइंस विभाग में एक कॉलेज से जारी अनुभव प्रमाण पत्र पूरी तरह संदिग्ध पाया गया था, लेकिन सिंडिकेट और प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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