मोतिहारी में चिनिमिल की जमीन से संबंधित मामले में जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने सदर अंचल के राजस्व कर्मचारी कृष्णा कुमार श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह मामला भू-हदबंदी रोक सूची से संबंधित है। आरोप है कि निलंबित कर्मचारी कृष्णा कुमार श्रीवास्तव ने ऐसी भूमि के परिमार्जन की अनुशंसा की, जिसे पटना उच्च न्यायालय ने सीडब्लूजेसी संख्या 13711/2024 (हर्षवर्धन बहेती बनाम बिहार राज्य) में 16 मई 2025 को रोक सूची से मुक्त करने का आदेश दिया था। गलत आधार पर स्वीकृति की अनुशंसा करने का आरोप इसके बावजूद, उन पर परिमार्जन प्रक्रिया में अनियमितता बरतने और गलत आधार पर स्वीकृति की अनुशंसा करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि राजस्व कर्मचारी ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। उनकी कार्यशैली में कर्तव्यहीनता, लापरवाही और अनुशासनहीनता स्पष्ट दिखी। उनके आचरण में भ्रष्टाचार की आशंका भी व्यक्त की गई है, जिसे जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया। जिलाधिकारी के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि गलत आधार पर परिमार्जन की अनुशंसा करना बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम 3(1) का उल्लंघन है। इसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के भी विपरीत माना गया है। मुख्यालय अंचल कार्यालय अरेराज हुआ निर्धारित निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय अंचल कार्यालय अरेराज निर्धारित किया गया है। उन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत जीवन-निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। अंचलाधिकारी सदर मोतिहारी को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध 15 दिनों के भीतर आरोप पत्र का गठन कर विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव समाहर्ता, पूर्वी चंपारण को भेजना सुनिश्चित करें। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चिनिमिल जमीन मामले में बड़ी कार्रवाई, राजस्व कर्मचारी निलंबित:डीएम ने अनियमितता पर लिया एक्शन, भ्रष्टाचार की आशंका
मोतिहारी में चिनिमिल की जमीन से संबंधित मामले में जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने सदर अंचल के राजस्व कर्मचारी कृष्णा कुमार श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह मामला भू-हदबंदी रोक सूची से संबंधित है। आरोप है कि निलंबित कर्मचारी कृष्णा कुमार श्रीवास्तव ने ऐसी भूमि के परिमार्जन की अनुशंसा की, जिसे पटना उच्च न्यायालय ने सीडब्लूजेसी संख्या 13711/2024 (हर्षवर्धन बहेती बनाम बिहार राज्य) में 16 मई 2025 को रोक सूची से मुक्त करने का आदेश दिया था। गलत आधार पर स्वीकृति की अनुशंसा करने का आरोप इसके बावजूद, उन पर परिमार्जन प्रक्रिया में अनियमितता बरतने और गलत आधार पर स्वीकृति की अनुशंसा करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि राजस्व कर्मचारी ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया। उनकी कार्यशैली में कर्तव्यहीनता, लापरवाही और अनुशासनहीनता स्पष्ट दिखी। उनके आचरण में भ्रष्टाचार की आशंका भी व्यक्त की गई है, जिसे जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया। जिलाधिकारी के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि गलत आधार पर परिमार्जन की अनुशंसा करना बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के नियम 3(1) का उल्लंघन है। इसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के भी विपरीत माना गया है। मुख्यालय अंचल कार्यालय अरेराज हुआ निर्धारित निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय अंचल कार्यालय अरेराज निर्धारित किया गया है। उन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत जीवन-निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। अंचलाधिकारी सदर मोतिहारी को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध 15 दिनों के भीतर आरोप पत्र का गठन कर विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव समाहर्ता, पूर्वी चंपारण को भेजना सुनिश्चित करें। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
