
Delhi to Saharsa Chhath Special Trains: मधेपुरा. दिल्ली में नौकरी करने वाला बेटा छठ पर घर आएगा, परिवार के साथ दीपावली मनाएगा और घाट पर अर्घ्य देने में हाथ बंटाएगा. कोसी के कई परिवारों के लिए त्योहारों की तैयारी के साथ यह इंतजार भी शुरू हो जाता है. लेकिन इस बार घर लौटने की योजना बनाने वाले प्रवासियों के सामने एक बड़ी चुनौती है- ट्रेन में कन्फर्म टिकट मिलना.
दीपावली और छठ के करीब आते ही दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले बिहार के लोगों की घर वापसी की मांग बढ़ जाती है. सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और आसपास के जिलों के हजारों लोग रोजगार, कारोबार और पढ़ाई के सिलसिले में दिल्ली तथा आसपास के शहरों में रहते हैं. उनके लिए त्योहार पर घर पहुंचना महज यात्रा नहीं, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने और परंपराओं से जुड़ने का मौका है. लेकिन लंबी दूरी की ट्रेनों में सीटों की बढ़ती मांग और प्रतीक्षा सूची के कारण उनकी चिंता बढ़ गयी है.
दीपावली 8 नवंबर को, छठ का अनुष्ठान 13 नवंबर से
इस साल दीपावली 8 नवंबर को है. छठ महापर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान 13 नवंबर को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा, जबकि 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा. <Cite refs={["turn352072search1","turn352072search7"]}/> दोनों पर्वों के बीच कम अंतर होने के कारण बहुत से प्रवासी एक ही यात्रा में परिवार के साथ दीपावली और छठ मनाने की योजना बनाते हैं.
कोसी क्षेत्र के सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और आसपास के जिलों के लोगों के लिए यह समय खास होता है. साल भर काम में व्यस्त रहने के बाद परिवार के साथ कुछ दिन बिताने, घर के कामों में हाथ बंटाने और छठ की तैयारियों में शामिल होने की इच्छा रहती है.
लेकिन टिकट नहीं मिलने पर पूरी योजना बिगड़ने का डर बना रहता है. कई परिवार पहले से यात्रा की तारीख तय करते हैं. छुट्टी की व्यवस्था भी उसी हिसाब से होती है. ऐसे में कन्फर्म टिकट नहीं मिलने पर यात्रा की तारीख बदलना या दूसरे विकल्प तलाशना मजबूरी बन जाता है.
वैशाली, पुरबिया और गरीब रथ पर यात्रियों का भरोसा
दिल्ली से सहरसा और कोसी क्षेत्र के आसपास पहुंचने के लिए वैशाली एक्सप्रेस, पुरबिया एक्सप्रेस और गरीब रथ जैसी ट्रेनें यात्रियों के महत्वपूर्ण विकल्पों में शामिल हैं. त्योहार के समय इन ट्रेनों में सीटों की मांग बढ़ जाती है. सीमित सीटों के मुकाबले यात्रियों की संख्या अधिक होने से आरक्षण हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
यात्रियों के मुताबिक, टिकट बुकिंग शुरू होते ही कई लोग आरक्षण कराने की कोशिश करते हैं. कुछ यात्रियों को टिकट मिल जाता है, लेकिन अन्य को लंबी प्रतीक्षा सूची का सामना करना पड़ता है. कुछ तारीखों पर ऑनलाइन बुकिंग के दौरान 'रिग्रेट' की स्थिति दिखने की बात भी सामने आ रही है. ऐसी स्थिति में यात्रियों के लिए कन्फर्म टिकट मिलने की उम्मीद कम हो जाती है.
परिवार के साथ यात्रा करने वालों की परेशानी और बढ़ जाती है. एक व्यक्ति को टिकट मिल जाने से समस्या हल नहीं होती, क्योंकि बच्चों, बुजुर्गों और दूसरे परिजनों के लिए भी सीटों की व्यवस्था करनी होती है. सभी सदस्यों के लिए एक साथ कन्फर्म टिकट मिलना आसान नहीं रहता.
60 दिन पहले से बुकिंग की कोशिश, फिर भी परेशानी
त्योहारों के दौरान घर लौटने की मांग को देखते हुए कई प्रवासी पहले से टिकट बुक कराने की तैयारी करते हैं. आरक्षण खुलने के समय ही टिकट लेने की कोशिश की जाती है, ताकि यात्रा की योजना समय रहते तय हो सके.
इसके बावजूद जब एक ही अवधि में बड़ी संख्या में लोग टिकट बुक कराने पहुंचते हैं, तो उपलब्ध सीटें जल्दी भर सकती हैं. मूल रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली से बिहार आने वाली ट्रेनों में आरक्षण शुरू होने के कुछ ही समय में टिकट बुक हो जाने और प्रतीक्षा सूची बढ़ने की स्थिति सामने आ रही है.
जिन यात्रियों को सामान्य आरक्षण में सफलता नहीं मिलती, वे तत्काल टिकट, दूसरी ट्रेन, वैकल्पिक मार्ग या सड़क परिवहन के विकल्प तलाशते हैं. हालांकि, त्योहार के नजदीक आने पर इन विकल्पों में भी भीड़ और खर्च बढ़ने की आशंका रहती है. तत्काल टिकट की उपलब्धता की भी गारंटी नहीं होती.
छठ केवल पर्व नहीं, घर लौटने की भावना भी
छठ महापर्व का कोसी क्षेत्र में गहरा सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है. घाटों की सफाई, घर-आंगन की तैयारी, प्रसाद बनाने, सूप और दउरा सजाने तथा व्रतियों की सेवा में परिवार के सदस्य मिलकर काम करते हैं. कई घरों में छठ की तैयारियां परिवार के सभी सदस्यों के एक साथ जुटने पर ही पूरी मानी जाती हैं.
दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों में काम करने वाले लोगों के घर लौटने का इंतजार उनके परिजन भी करते हैं. जिन परिवारों में बुजुर्ग माता-पिता हैं, उनके लिए पर्व पर बच्चों का घर आना खास मायने रखता है. छोटे बच्चों को गांव और परिवार से मिलाने की योजना बना रहे अभिभावकों के लिए भी यात्रा की अनिश्चितता परेशानी बढ़ाती है.
कई प्रवासी सीमित छुट्टी लेकर घर आने की योजना बनाते हैं. निजी कंपनियों, दुकानों, कारखानों और दूसरे प्रतिष्ठानों में काम करने वालों के लिए त्योहार पर छुट्टी मिलना ही चुनौती हो सकता है. ऐसे में छुट्टी मिलने के बाद भी टिकट नहीं मिलने पर परिवार के साथ पर्व मनाने की उम्मीद अधूरी रह सकती है.
रेलवे से विशेष ट्रेन और अतिरिक्त बोगियों की उम्मीद
त्योहारों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए कोसी क्षेत्र के यात्रियों को रेलवे से राहत की उम्मीद है. यात्रियों की मांग है कि दिल्ली से सहरसा और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाली ट्रेनों में जरूरत के अनुसार अतिरिक्त बोगियां लगायी जाएं और विशेष ट्रेनें चलाने पर विचार किया जाए.
अतिरिक्त ट्रेनें या मौजूदा ट्रेनों में क्षमता बढ़ाने से अधिक यात्रियों को घर पहुंचने का विकल्प मिल सकता है. इसके साथ ही अतिरिक्त फेरे, वैकल्पिक मार्ग और प्रमुख स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं भी उपयोगी हो सकती हैं.
हालांकि, विशेष ट्रेनों, अतिरिक्त बोगियों या अतिरिक्त फेरों के संबंध में रेलवे की आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही उनकी उपलब्धता, समय-सारिणी और ठहराव स्पष्ट होंगे. फिलहाल यात्रियों की चिंता टिकटों की उपलब्धता को लेकर बनी हुई है.
Delhi to Saharsa Chhath Special Trains: समय पर टिकट और सुरक्षित यात्रा की आस
दीपावली की रोशनी से लेकर छठ घाटों पर उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक, कोसी के प्रवासियों की कोशिश यही है कि वे अपने परिवार के साथ त्योहार मना सकें. उनके लिए यह यात्रा साल भर की दूरी को कम करने और घर-परिवार के साथ समय बिताने का अवसर है.
अब यात्रियों की निगाह रेलवे की ओर से संभावित विशेष व्यवस्था पर टिकी है. यदि त्योहारों की भीड़ के अनुरूप अतिरिक्त सीटें और ट्रेनें उपलब्ध करायी जाती हैं, तो दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले बिहार के लोगों को राहत मिल सकती है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि घर लौटने की तैयारी कर रहे प्रवासियों को समय पर कन्फर्म टिकट मिल पाएगा या उन्हें वैकल्पिक यात्रा का सहारा लेना पड़ेगा.
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