![]()
पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा प्रखंड में सुवर्णरेखा नदी किनारे काफी पुराने विस्फोटक के मिलने से हड़कंप मच गया है। रांची से पहुंची बम निरोधक टीम ने प्रारंभिक जांच में इसे एक शक्तिशाली जिंदा बम होने की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि यह एएन-एम 64 500 बी…अमेरिकन मेड श्रेणी का बम हो सकता है, जिसका वजन करीब 227 किलो है और यह बेहद घातक स्थिति में है। बम निरोधक दस्ते के प्रभारी नंदकिशोर सिंह ने बताया कि यह बम आकार में काफी बड़ा और खतरनाक है। इसे सामान्य तरीके से नष्ट करना संभव नहीं है। इसे निष्क्रिय करने के लिए उच्च स्तरीय तकनीक की जरूरत है, जो केवल सेना के पास उपलब्ध है। मालूम हो कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बम मिलने वाले क्षेत्र को पूरी तरह सील कर दिया है। इलाके में अलर्ट, लोगों के जाने पर पाबंदी
स्थानीय प्रशासन ने आसपास के ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिया है कि वे नदीकिनारे उस स्थान पर न जाएं और किसी भीतरह की छेड़छाड़ से बचें। इसके बावजूद घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके प रपहुंचे और दूर से इस बम को देखने की कोशिश करते रहे। बालू में दबा था मौत का गोला
नदी किनारे बालू-मिट्टी के भीतर दबा यह बम मिलने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पहले इसे साधारण लोहे की वस्तु समझा जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह विस्फोटक गिरातो था, लेकिन फटा नहीं, वह वर्षों बाद भी सक्रिय रह सकता है और कभी भी विस्फोट कर सकता है। स्थानीय बुजुर्गों से मिली जानकारी के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में हवाई गतिविधियां हुई थीं। आशंका जताई जा रही है कि उस समय किसी विमान ने वजन कम करने के लिए हथियार नीचे गिराए थे, जिनमें से कुछ को बाद में हटाया गया, लेकिन यहबम दबा रह गया। पहले भी मिल चुका है ऐसा बम
करीब सात महीने पहले पश्चिम बंगाल के गोपीवल्लभपुर थानाक्षेत्र के धरमपुर गांव के पास भी सुवर्णरेखा नदी में इसी प्रकार का बम मिला था, जिसे बाद में एयरफोर्स की मदद से सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया गया था। घटना के बाद इलाके में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द सेना या विशेषज्ञ टीम बुलाकर इस बम को सुरक्षित तरीके से हटाया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
जमशेदपुर में मिला 227KG का जिंदा बम, एरिया सील:सेना ही कर सकती है डिफ्यूज; बालू मे दबा था, द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ रहे तार
Date:




